Mizoram: सीएम बोले- अगर जमीन सौदे में सबूतों से साबित हुई मेरी संलिप्तता तो इस्तीफा दूंगा; क्या है पूरा विवाद?

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Mizoram: सीएम बोले- अगर जमीन सौदे में सबूतों से साबित हुई मेरी संलिप्तता तो इस्तीफा दूंगा; क्या है पूरा विवाद?: ताजा अपडेट

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लालदुहोमा ने कहा, अगर इस मामले में मेरी संलिप्तता सबूतों से प्रमाणित होती है, तो मैं खुद को इस राज्य का नेतृत्व करने योग्य नहीं मानूंगा और तुरंत इस्तीफा दे दूंगा। विज्ञापन विज्ञापन

Mizoram:: घटना का पूरा विवरण

कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री जॉन रोटलुआंग्लियाना ने 13 फरवरी को आरोप लगाया था कि लालदुहोमा इस कथित घोटाले में शामिल हैं और उन्होंने भारी रिश्वत हासिल की है। रोटलुआंग्लियाना ने कांग्रेस भवन में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, हमारे पास जो जानकारी है उसके अनुसार मुख्यमंत्री का हिस्सा 14 करोड़ रुपये थे, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये प्राप्त किए। उन्होंने यह भी दावा किया कि लालदुहोमा ने भुगतान सोने में करने का अनुरोध किया था।

सीएम लालदुहोमा ने आरोपों पर क्या कहा?

लालदुहोमा ने एक स्थानीय टेलीविजन चैनल को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता के ‘रिश्वत लेने’ के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आरोप उनके व्यक्तिगत सम्मान और सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) की ईमानदारी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने पलटवार करते हुए दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री जोरामथांगा के नेतृत्व वाली मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) सरकार ने लेंगपुर हवाई अड्डे के पास जमीन को भारतीय वायु सेना (आईएएफ) को स्थायी रूप से सीधे खरीद समझौते के जरिये गैरकानूनी तरीके से बेचने का प्रयास किया था।

Mizoram:: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

सीबीआई जांच को लेकर सीएम ने क्या कहा?

उन्होंने कहा कि उनकी मौजूदा सरकार केवल मालिक और खरीददार के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य कर रही है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरका स्थायी बिक्री के बजाय लीज की प्रक्रिया का पालन कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) करेगी, जिसके बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। यह जमीन राज्य के एकमात्र हवाई अड्डे लेंगपुई के पास और राजधानी आइजोल से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित है। इसे लड़ाकू विमानों और ईंधन सुविधा के लिए एक बेस बनाने के लिए भारतीय वायु सेना अधिगृहित किया था। इस अधिग्रहण के बाद राजनीति दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ है।

एमएनएफ और कांग्रेस ने दर्ज करवाई शिकायतें

विपक्षी एमएनएफ और कांग्रेस दोनों ने अलग-अलग शिकायतें दर्ज करवाई हैं, जिसमें सीबीआई जांच की मांग की गई है। आइजोल में सीबीआई के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि इस मामले को एजेंसी की इंफाल शाखा कार्यालय को भेजा गया है। विपक्षी दलों ने यह कहते हुए कुल 187.90 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है कि अधिग्रहण को तेजी से पूरा करने के लिए मानक कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि दो व्यक्तियों ने अधिकांश मुआवजा प्राप्त किया , जो मूल भूमि मालिक नहीं थे, जबकि मूल मालिकों को कथित तौर पर बहुत कम या कुछ भी नहीं मिला।

लालदुहोमा ने कहा, अगर इस मामले में मेरी संलिप्तता सबूतों से प्रमाणित होती है, तो मैं खुद को इस राज्य का नेतृत्व करने योग्य नहीं मानूंगा और तुरंत इस्तीफा दे दूंगा।कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री जॉन रोटलुआंग्लियाना ने 13 फरवरी को आरोप लगाया था कि लालदुहोमा इस कथित घोटाले में शामिल हैं और उन्होंने भारी रिश्वत हासिल की है। रोटलुआंग्लियाना ने कांग्रेस भवन में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, हमारे पास जो जानकारी है उसके अनुसार मुख्यमंत्री का हिस्सा 14 करोड़ रुपये थे, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर 10 करोड़ रुपये प्राप्त किए। उन्होंने यह भी दावा किया कि लालदुहोमा ने भुगतान सोने में करने का अनुरोध किया था।लालदुहोमा ने एक स्थानीय टेलीविजन चैनल को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता के ‘रिश्वत लेने’ के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये आरोप उनके व्यक्तिगत सम्मान और सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) की ईमानदारी दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने पलटवार करते हुए दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री जोरामथांगा के नेतृत्व वाली मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) सरकार ने लेंगपुर हवाई अड्डे के पास जमीन को भारतीय वायु सेना (आईएएफ) को स्थायी रूप से सीधे खरीद समझौते के जरिये गैरकानूनी तरीके से बेचने का प्रयास किया था।ये भी पढ़ें: मुंबई पहुंचे फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों, पीएम मोदी के साथ आज करेंगे द्विपक्षीय वार्ता उन्होंने कहा कि उनकी मौजूदा सरकार केवल मालिक और खरीददार के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य कर रही है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरका स्थायी बिक्री के बजाय लीज की प्रक्रिया का पालन कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) करेगी, जिसके बाद सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। यह जमीन राज्य के एकमात्र हवाई अड्डे लेंगपुई के पास और राजधानी आइजोल से करीब 32 किलोमीटर दूर स्थित है। इसे लड़ाकू विमानों और ईंधन सुविधा के लिए एक बेस बनाने के लिए भारतीय वायु सेना अधिगृहित किया था। इस अधिग्रहण के बाद राजनीति दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ है।विपक्षी एमएनएफ और कांग्रेस दोनों ने अलग-अलग शिकायतें दर्ज करवाई हैं, जिसमें सीबीआई जांच की मांग की गई है। आइजोल में सीबीआई के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि इस मामले को एजेंसी की इंफाल शाखा कार्यालय को भेजा गया है। विपक्षी दलों ने यह कहते हुए कुल 187.90 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है कि अधिग्रहण को तेजी से पूरा करने के लिए मानक कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि दो व्यक्तियों ने अधिकांश मुआवजा प्राप्त किया , जो मूल भूमि मालिक नहीं थे, जबकि मूल मालिकों को कथित तौर पर बहुत कम या कुछ भी नहीं मिला।

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने सोमवार को कहा कि अगर किसी भी सबूत से यह साबित होता है कि वह जारी लेंगपुरई जमीन सौदे विवाद में कथित वित्तीय अनियमितताओं में शामिल हैं, तो वह तत्काल इस्तीफा दे देंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि अगर विपक्ष यह साबित कर सके कि उन्होंने किसी तरह की रिश्वत ली है, तो वह राज्य का नेतृत्व करने योग्य नहीं रहेंगे।

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