NGT:: मुख्य समाचार और अपडेट
NGT:: न्यायाधिकरण ने हरियाणा में पर्यावरण उल्लंघन से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि एक संयुक्त समिति पर्यावरण निकाय के निर्देशों के अनुसार पिछले साल नवंबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने में विफल रही। न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा, ‘हमने पाया है कि इस न्यायाधिकरण द्वारा प्रति-शपथपत्र या रिपोर्ट दाखिल करने की अवधि निर्दिष्ट करने वाले आदेशों के बावजूद, संबंधित पक्ष या समितियां निर्धारित अवधि के बाद इन्हें दाखिल करने की स्वतंत्रता ले लेती हैं, जिससे अनावश्यक स्थगन होता है और समय की सरासर बर्बादी होती है।’पीठ ने आगे कहा कि किसी भी असाधारण तथ्य और परिस्थितियों के मामले में, पक्षकार या समिति न्यायाधिकरण से समय बढ़ाने का अनुरोध कर सकती है या विलंबित रिपोर्ट प्रस्तुत करते समय देरी की माफी के लिए याचिका दायर कर सकती है। न्यायाधिकरण ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार की विलंबित रिपोर्टों को उसकी स्पष्ट अनुमति के बिना रिकॉर्ड में नहीं रखा जा सकता। उसने कहा कि ऐसी रिपोर्टों को असुविधा, विलंब और अनावश्यक स्थगन के लिए उचित लागत जमा करने के बाद ही रिकॉर्ड में लिया जाना चाहिए।
संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।
ताजा खबरों के लिए upkhabarhindi.com के साथ बने रहें।
मूल खबर यहाँ पढ़ें (Read Original)
