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Notice: संसद में कुत्ता लाने और सांसदों पर टिप्पणी करने पर घिरीं कांग्रेस सांसद, विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी

josephben1999gd@gmail.com
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Notice: संसद में कुत्ता लाने और सांसदों पर टिप्पणी करने पर घिरीं कांग्रेस सांसद, विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी: ताजा अपडेट

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Meta Description: Notice: News: Notice: संसद में कुत्ता लाने और सांसदों पर टिप्पणी करने पर घिरीं कांग्रेस सांसद, विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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Notice:: मुख्य समाचार और अपडेट

Notice:: नई दिल्ली में संसद परिसर से जुड़ा एक बयान अब बड़ा विवाद बन गया है। राज्यसभा की कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी को संसद की विशेषाधिकार समिति ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया है। मामला संसद परिसर में एक आवारा कुत्ते को कार से लाने और सांसदों को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने से जुड़ा है। शिकायत भाजपा सांसदों की ओर से की गई, जिसके बाद प्रक्रिया शुरू हुई है।

आरोप है कि शीतकालीन सत्र के दौरान एक दिसंबर को रेणुका चौधरी एक रेस्क्यू किए गए आवारा कुत्ते को अपनी कार में संसद परिसर लेकर आईं। इस पर कुछ सांसदों ने आपत्ति जताई। शिकायत के अनुसार, इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “अंदर बैठे लोग काटते हैं, कुत्ते नहीं।” इसे सांसदों की गरिमा के खिलाफ और अपमानजनक टिप्पणी बताया गया। इसी बयान और सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन को आधार बनाकर विशेषाधिकार हनन की शिकायत दी गई।सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने शिकायत को संज्ञान में लेकर रेणुका चौधरी से लिखित जवाब मांगा है। उन्हें 23 फरवरी तक अपना पक्ष रखने को कहा गया है। यह शिकायत भाजपा सांसद बृजलाल और इंदुबाला गोस्वामी ने नियम 188 के तहत दी। शिकायत में कहा गया कि इस तरह का बयान दोनों सदनों के निर्वाचित सांसदों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। राज्यसभा के सभापति ने शिकायत को समिति के पास भेजा, जिसके बाद समिति ने पिछली बैठक में इस पर विचार किया।रेणुका चौधरी के दफ्तर से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि वह संसदीय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत जवाब देंगी। उनका कहना रहा है कि उन्होंने रास्ते में एक घायल आवारा कुत्ते को बचाया था और ड्राइवर को उसे पशु चिकित्सक के पास ले जाना था। उन्होंने यह भी कहा कि आवारा कुत्ते को बचाने के खिलाफ कोई कानून नहीं है। विवाद बढ़ने पर कुछ भाजपा सांसदों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। बाद में जब नोटिस पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने पत्रकारों से संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। मामला अब विशेषाधिकार समिति के विचाराधीन है।

संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।


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