Railway: हाथियों को बचाने के लिए रेलवे ने ट्रैक पर लगाया ऑप्टिकल फाइबर-AI कैमरा,जानें कैसे काम करेगा ये सिस्टम

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Railway: हाथियों को बचाने के लिए रेलवे ने ट्रैक पर लगाया ऑप्टिकल फाइबर-AI कैमरा,जानें कैसे काम करेगा ये सिस्टम: ताजा अपडेट

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Railway:: भारतीय रेलवे हाथियों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। जंगलों से गुजरने वाली पटरियों पर हाईटेक तकनीक लगाई जा रही है, जिससे हाथी सुरक्षित रूप से ट्रैक पार कर सकें। ऑप्टिकल फाइबर और एआई कैमरा जैसी तकनीक अब सीधे हाथियों की हलचल को पहचानकर समय रहते ट्रेन को अलर्ट भेजती हैं। इससे हाथी सुरक्षित ट्रैक पार कर पाते हैं और हादसों का जोखिम कम होता है।

बुधवार को लोकसभा में रेल मंत्री ने हाथियों की सुरक्षा और पटरियां पार करने से जुड़े सवाल के जवाब दिए। रेल मंत्री ने कहा, हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रेलवे ने कई कदम उठाए हैं। कई स्थानों पर अंडरपास और ओवरपास बनाए गए हैं। नई तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया जा रहा है। देशभर में करीब दो हजार किलोमीटर रेलवे ट्रैक ऐसे वन क्षेत्रों से गुजरते हैं, जहां हाथी अक्सर पटरियां पार करते हैं। ऐसे चिन्हित हिस्सों में दो विशेष तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इनमें एक तकनीक ऑप्टिकल फाइबर केबल पर आधारित है, जबकि दूसरी एआई कैमरा आधारित तकनीक है।रेल मंत्री ने सदन को बताया, ऑप्टिकल फाइबर केबल तकनीक में रेलवे ट्रैक के साथ एक ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाती है। जब किसी हाथी की हलचल पटरियों के आसपास होती है तो यह सिस्टम सिग्नल पकड़ लेता है और तुरंत ड्राइवर के साथ कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देता है। इससे समय रहते ट्रेन की गति कम की जा सकती है। हाथियों को सुरक्षित बचाया जा सकता है। दूसरी तकनीक एआई कैमरों पर आधारित है। इसके जरिए दूर से ही हाथियों की गतिविधि का पता चल जाता है, जिससे समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।रेलमंत्री ने कवच प्रणाली से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए कहा, यह रेलवे की एक उन्नत सुरक्षा प्रणाली है। इसमें पांच अलग अलग हिस्से होते हैं। इसके तहत अब तक 8,570 किलोमीटर रेल मार्ग पर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है। इसके साथ ही कम दूरी पर टेलीकॉम टावर लगाए जा रहे हैं, जिनमें से 1,100 टावर स्थापित हो चुके हैं। हर स्टेशन पर स्टेशन डेटा सेंटर भी लगाए जा रहे हैं। अब तक 767 स्टेशनों पर यह काम पूरा हो चुका है। 6,776 किलोमीटर रेल ट्रैक पर ट्रैकसाइड उपकरण लगाए जा चुके हैं। ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अब तक 4,154 लोकोमोटिव में कवच प्रणाली लगाई जा चुकी है।रेल मंत्री ने कहा, कोंकण रेलवे लाइन बेहद महत्वपूर्ण रेल मार्ग है। जो पूरे कोंकण तट को जोड़ती है। इस रूट पर सुरंगों और ट्रैक को लगातार मजबूत बनाने का काम किया जा रहा है। लाइन की क्षमता बढ़ाने और डबल लाइन बनाने के लिए इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम भी शुरू हो चुका है। इस परियोजना में चार राज्यों की भागीदारी है, इसलिए इसे आगे बढ़ाने के लिए सभी का सहयोग जरूरी होगा। महाराष्ट्र और गोवा सरकार से मदद मिल रही है। कर्नाटक और केरल सरकार से सहयोग की अपेक्षा है।एक अन्य प्रश्न के जवाब में रेल मंत्री ने कहा, कल्याण-मुरबाड रेलवे लाइन महाराष्ट्र के भिवंडी-कल्याण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। यह इलाके के लोगों के लिए अहम कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इस परियोजना की लागत करीब 836 करोड़ रुपये है। हालांकि यह क्षेत्र काफी शहरीकृत है। इसी वजह से जमीन अधिग्रहण की लागत अधिक है। इसका शुरुआती अनुमान लगभग 1400 करोड़ रुपये लगाया गया था। जमीन अधिग्रहण से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने और परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सांसदों और मुख्यमंत्री की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।

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