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Meta Description: Republic News: Republic Day Parade 2026: बैक्ट्रियन ऊंट, रैप्टर्स, K9 दस्ता, जांस्कर पोनी… परेड में दिखे कौन हैं ये ‘मूक यो – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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Republic: मुख्य समाचार और अपडेट
Republic: 26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ पर जब दुनिया भारत की सैन्य ताकत देखेगी, तब सिर्फ टैंक, मिसाइल और जवान ही कदमताल नहीं करेंगे। इस बार परेड में पहली बार भारतीय सेना अपने उन योद्धाओं को भी सामने लाएगी, जो बिना बोले युद्ध जीतते हैं। ये हैं भारतीय सेना के ‘मूक योद्धा’ शिकारी पक्षी बाज, सेना के कुत्ते, बैक्ट्रियन ऊंट और जांस्कर पोनी।
आकाश से जमीन तक, बर्फ से रेगिस्तान तक। इनसे छिपना मुश्किल नहीं, नामुमकिन है। ये सिर्फ जानवर नहीं, भारत की सीमाओं की असली ताकत हैं। दुश्मनों के लिए ये सीधी चेतावनी हैं भारत हर मोर्चे पर तैयार है।
Republic: घटना का पूरा विवरण
करन-अर्जुन: आकाश के साइलेंट स्ट्राइकर्स
परेड में शामिल चार शिकारी पक्षी, जिन्हें रैप्टर्स या ‘बाज’ कहा जाता है, भारतीय सेना की आंखें हैं। ये बाज आसमान से हर हलचल पर नजर रखते हैं। ड्रोन, घुसपैठ और बर्ड-स्ट्राइक जैसी चुनौतियों से निपटने में इनकी भूमिका अहम है।
इनमें खास हैं करन और अर्जुन दो ऐसे प्रशिक्षित बाज, जो दुश्मन की हवाई गतिविधियों को पहचानने और रोकने में माहिर हैं। इनकी नजर कई किलोमीटर दूर की हलचल पकड़ सकती है। ये प्राकृतिक सर्विलांस सिस्टम हैं बिना बैटरी, बिना नेटवर्क। कर्तव्य पथ पर उड़ते ये बाज साफ संदेश देंगे भारत का आकाश अब पूरी तरह सुरक्षित है।
Republic: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
जमीन के साइलेंट वॉरियर्स: K9 दस्ता
इस परेड का सबसे भावुक और प्रभावशाली हिस्सा होंगे भारतीय सेना के कुत्ते। कुल 16 कुत्ते परेड में शामिल हैं जिनमें 10 भारतीय नस्लें और 6 पारंपरिक मिलिट्री डॉग्स हैं।
मुधोल हाउंड, रमपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बई और राजापलायम जैसी भारतीय नस्लें अब सेना की नई पहचान बन रही हैं। ये विस्फोटक खोजने, आतंकी ट्रैकिंग, सर्च ऑपरेशन और आपदा राहत में अहम भूमिका निभाते हैं। अंधेरे में भी दुश्मन की गंध पकड़ लेना इनकी खासियत है। कई बार इन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना सैनिकों की जान बचाई है। ये जमीन पर करन-अर्जुन की तरह लड़ते हैं बिना शोर, बिना चूक।
ठंडे रेगिस्तान के योद्धा: बैक्ट्रियन ऊंट
परेड में पहली बार दो बैक्ट्रियन ऊंट भी शामिल हुए हैं। ये डबल-हम्प वाले ऊंट खासतौर पर लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी इलाकों के लिए बने हैं। 15,000 फीट की ऊंचाई पर भी ये आसानी से काम करते हैं।
250 किलो तक वजन उठाने की क्षमता, कम पानी में लंबी दूरी तय करने की ताकत और बेहद कम संसाधनों में भी ऑपरेशन को संभव बनाना ये ऊंट LAC पर लॉजिस्टिक्स की रीढ़ हैं। दुश्मन चाहे जहां छिपे, सेना वहां पहुंचेगी इन ऊंटों के दम पर।
सियाचिन के साइलेंट हीरो: जांस्कर पोनी
चार जांस्कर पोनी भी परेड का हिस्सा बनी हैं। ये लद्दाख की दुर्लभ और स्वदेशी नस्ल हैं। माइनस 40 डिग्री तापमान में भी ये काम करती हैं।
जहां मशीनें फेल हो जाती हैं, वहां ये पोनी सेना का सहारा बनती हैं। 40 से 60 किलो वजन ढोना, एक दिन में 70 किलोमीटर तक चलना और बेहद ऊंचाई पर काम करना ये सब इनकी खासियत है। साल 2020 के बाद इन्हें सियाचिन जैसे कठिन इलाकों में शामिल किया गया। ये भारत की ऊंची सीमाओं की ढाल हैं।
इन सभी मूक योद्धाओं को मेरठ स्थित रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर (RVC) में विशेष ट्रेनिंग दी गई है। यहीं से इन्हें सीमाओं के लिए तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि RVC में पहली बार महिला अधिकारी भी तैनात की गई हैं, जो इन योद्धाओं की देखभाल और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
भारतीय सेना भले ही ड्रोन, रोबोट और आधुनिक हथियारों से लैस हो रही हो, लेकिन पारंपरिक योद्धाओं की भूमिका आज भी उतनी ही अहम है। 26 जनवरी 2026 को कर्तव्य पथ सिर्फ सैनिकों की परेड नहीं देखेगा, बल्कि भारत की उस ताकत का गवाह बनेगा जो बिना बोले युद्ध जीतती है।
दुश्मनों के लिए संदेश साफ है भारत के करन-अर्जुन अब कई रूपों में खड़े हैं। बचना संभव नहीं, असंभव है।
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