...

⚡️ भारत में बैठीं शेख हसीना को हुई मौत की सज़ा: अब आगे क्या? भारत और इंटरपोल की भूमिका

josephben1999gd@gmail.com
बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके दो शीर्ष सहयोगियों को जुलाई विद्रोह और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सज़ा सुनाई है। जानिए भारत में बैठीं हसीना को गिरफ्तार करने के लिए बांग्लादेश कैसे इंटरपोल रेड नोटिस जारी करेगा और इस मामले में भारत की भूमिका कितनी अहम है।

दुनिया डेस्क | Nov 17, 2025

क्या है बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला?

बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को दोषी ठहराते हुए एक अभूतपूर्व फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हसीना और उनके दो उच्चाधिकारियों को **शेख हसीना मौत की सज़ा** दी है।

यह सज़ा पिछले साल हुए जुलाई विद्रोह और मानवता के खिलाफ गंभीर अपराधों के लिए दी गई है। आरोप है कि हसीना के निर्देश पर निहत्थे नागरिकों पर गोलियां चलाई गईं।

हसीना फिलहाल बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद से ही भारत में शरण लिए हुए हैं। इस फैसले ने नई दिल्ली और ढाका के बीच कूटनीतिक तनाव को अचानक बढ़ा दिया है।

शेख हसीना ने फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी है?

भारत में मौजूद शेख हसीना ने इस फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे एक “राजनीतिक प्रतिशोध” और “अवैध” कार्रवाई करार दिया है।

उनके करीबी सूत्रों के अनुसार, हसीना ने ट्रिब्यूनल को एक “फर्जी कोर्ट” बताते हुए कहा है कि यह फैसला राजनीतिक मकसद से लिया गया है।

फिलहाल, उन्हें भारत में उच्च स्तरीय सुरक्षा मिली हुई है, जिससे उनकी तत्काल गिरफ्तारी की संभावना कम है। **शेख हसीना मौत की सज़ा** के खिलाफ अपील करने के लिए उनके कानूनी दल के पास सीमित विकल्प हैं, क्योंकि वह अपने देश से बाहर हैं।

इंटरपोल रेड नोटिस क्या है और क्या भारत हसीना को सौंपेगा?

बांग्लादेश सरकार अब हसीना को गिरफ्तार करने के लिए इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी करने की तैयारी कर रही है।

हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि RCN कोई **अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट** नहीं है, बल्कि यह सिर्फ एक **अंतरराष्ट्रीय पुलिस अलर्ट** होता है।

इंटरपोल का सदस्य होने के बावजूद, भारत किसी भी व्यक्ति को सौंपने के लिए अपने संप्रभु कानून और प्रत्यर्पण संधियों का पालन करता है। चूंकि यह मामला स्पष्ट रूप से राजनीतिक प्रकृति का है, इसलिए भारत इसे मानने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।

भारत की विदेश नीति के जानकारों का मानना है कि **शेख हसीना मौत की सज़ा** मिलने के बाद भी, भारत शायद ही उन्हें सौंपेगा। ऐसा करने से न केवल भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल उठेंगे, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी कानून का भी उल्लंघन होगा।

भारत के लिए यह मामला क्यों बना कूटनीतिक संकट?

भारत के सामने इस समय एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है। एक तरफ, हसीना भारत की पुरानी और मजबूत सहयोगी रही हैं। दूसरी तरफ, भारत को बांग्लादेश की नई सरकार के साथ भी स्थिर संबंध बनाए रखने हैं, जो चीन की ओर झुकाव रख सकती है।

हसीना को शरण देना जारी रखने से नई ढाका सरकार से रिश्ते बिगड़ सकते हैं। वहीं, उन्हें सौंपना भारत के पुराने सुरक्षा सहयोगियों के बीच विश्वास को तोड़ सकता है।

भारत को अब **शेख हसीना मौत की सज़ा** के मामले में ऐसा संतुलन बनाना होगा, जिससे उसके सामरिक हित और मानवीय सिद्धांत दोनों सुरक्षित रहें। यह फैसला दक्षिण एशिया में भारत की “पड़ोस पहले” नीति की वास्तविक परीक्षा होगी।

आगे क्या होगा? क्या UN हस्तक्षेप करेगा?

बांग्लादेश सरकार ने धमकी दी है कि अगर भारत सहयोग नहीं करता है, तो मामले को संयुक्त राष्ट्र (UN) में उठाया जा सकता है।

हालांकि, UN का सीधा हस्तक्षेप दुर्लभ है। अंतिम निर्णय भारत के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय द्वारा द्विपक्षीय वार्ताओं और अंतरराष्ट्रीय कानून के विश्लेषण पर आधारित होगा।

सबसे संभावित परिदृश्य यह है कि भारत इस मामले में विलंब की रणनीति अपनाएगा या पर्दे के पीछे से हसीना को किसी तीसरे देश में सुरक्षित रूप से भेजने के लिए कूटनीतिक समाधान की तलाश करेगा। **शेख हसीना मौत की सज़ा** ने दक्षिण एशिया की राजनीति को एक अस्थिर मोड़ पर ला खड़ा किया है।

यह लेख प्राप्त सूचनाओं के आधार पर बनाया गया है और किसी भी कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य नहीं है।

 

Leave a comment

Please Login to Comment.

Seraphinite AcceleratorOptimized by Seraphinite Accelerator
Turns on site high speed to be attractive for people and search engines.