Focus Keyword: श्री प्रकाश शुक्ला
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र का नाम जब भी अपराध और राजनीति के गठजोड़ से जोड़ा जाता है, तो एक नाम हमेशा सामने आता है — श्री प्रकाश शुक्ला। 90 के दशक के उत्तरार्ध में यह नाम पूरे प्रदेश में खौफ का पर्याय बन गया था।
“पूर्वांचल का डॉन” कहे जाने वाले श्री प्रकाश शुक्ला की कहानी अपराध, सत्ता और सिस्टम की कमजोरी का आईना है। पुलिस और प्रशासन ने जिस तरह उसके खौफ के आगे नतमस्तक होकर एक विशेष टास्क फोर्स बनाई, वह इतिहास का हिस्सा बन गई।
श्री प्रकाश शुक्ला का शुरुआती जीवन और शिक्षा
श्री प्रकाश शुक्ला का जन्म उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। बचपन में वह पढ़ाई में अच्छा था और खेलकूद में भी हिस्सा लेता था। परंतु युवावस्था में एक घटना ने उसका जीवन बदल दिया। कॉलेज के दिनों में उसके एक मित्र की हत्या हो गई, जिसके बाद उसने बदले की राह पकड़ ली।
अपराध की दुनिया में प्रवेश
पहली बार श्री प्रकाश शुक्ला ने अपने मित्र के हत्यारे को गोली मारकर अपराध की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने अपना नेटवर्क पूर्वांचल, गोरखपुर, फैजाबाद, लखनऊ और बस्ती तक फैला लिया। उसके गैंग में दर्जनों शूटर शामिल थे जो सुपारी किलिंग, ठेकेदारी विवाद और राजनीतिक हत्याओं में शामिल रहे।
राजनीति और अपराध का गठजोड़
90 के दशक में उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपराधियों की पैठ काफी गहरी हो चुकी थी। कई नेताओं और ठेकेदारों के श्री प्रकाश शुक्ला से सीधे संबंध थे। कहा जाता है कि उसने मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की हत्या के लिए 6 करोड़ रुपये की सुपारी ली थी।
इस खुलासे के बाद राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश पुलिस के भीतर एक विशेष टीम गठित की — स्पेशल टास्क फोर्स (STF)। इसका उद्देश्य सिर्फ एक था: श्री प्रकाश शुक्ला का सफाया।

STF की कार्रवाई और श्री प्रकाश शुक्ला का अंत
STF ने महीनों तक श्री प्रकाश शुक्ला की गतिविधियों पर नजर रखी। अंततः 22 सितंबर 1998 को गाजियाबाद-बुलंदशहर रोड पर एक मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने दावा किया कि मुठभेड़ में श्री प्रकाश शुक्ला और उसके दो साथी मारे गए।
यह एनकाउंटर राष्ट्रीय सुर्खियों में छा गया। इसे उत्तर प्रदेश पुलिस की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना गया।
श्री प्रकाश शुक्ला का अपराध साम्राज्य और संपत्ति
मौत के समय तक श्री प्रकाश शुक्ला के पास करोड़ों की संपत्ति थी। उसके पास लग्जरी गाड़ियाँ, हथियार और बिहार, झारखंड व दिल्ली तक फैला नेटवर्क था। वह उस दौर के उन गिने-चुने अपराधियों में से था जिसके पास मोबाइल फोन था, जिससे उसकी लोकेशन ट्रैक करना लगभग असंभव था।
लोकप्रियता और रहस्य
हालांकि वह अपराधी था, लेकिन पूर्वांचल के कई इलाकों में श्री प्रकाश शुक्ला को “रोबिनहुड” की तरह भी देखा जाता था। उसकी कहानी पर कई फिल्में और वेब सीरीज़ बन चुकी हैं, जिनमें “रक्तांचल” और “गैंग्स ऑफ वासेपुर” जैसी सीरीज़ प्रमुख हैं।
आज भी उसकी मौत को लेकर विवाद हैं — कुछ लोग इसे राजनीतिक षड्यंत्र कहते हैं, जबकि कुछ इसे पुलिस की रणनीतिक सफलता मानते हैं।
निष्कर्ष
श्री प्रकाश शुक्ला की कहानी अपराध, सत्ता और भय के उस संगम की गवाही देती है जिसने एक सामान्य युवक को “पूर्वांचल का डॉन” बना दिया। उसकी मौत के बाद भी उसका नाम उत्तर प्रदेश के अपराध इतिहास में एक रहस्य की तरह दर्ज है।

