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Meta Description: SIR Controversy: News: SIR Controversy: TMC नेता कुणाल घोष ने लगाया भाजपा पर ‘वोट चोरी’ का आरोप, रेड पर भी दागे सवाल! – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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SIR Controversy:: मुख्य समाचार और अपडेट
SIR Controversy:: TMC नेता कुणाल घोष ने कहा, “वे समझ गए हैं कि वे बुरी तरह हारने वाले हैं। चुनाव का दुरुपयोग करके उन्होंने वोट चोरी करने का प्रयास किया। वोट चोर भाजपा असली मतदाताओं को परेशान कर रही है। TMC के कार्यकर्ता पूरे राज्य में उतर गए और नागरिकों का साथ दे रहे हैं इसलिए अभी वे डाटा चोरी का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने जिस केस में रेड किया है अगर उसमें रेड की जरूरत थी, अगर जांच की जरूरत थी, अगर पूछताछ की जरूरत थी तो इतने दिन क्यों नहीं किए? आज जब चुनाव सामने है, I-PAC हमारे सलाहकार भूमिका में है। पूरे राज्य में प्रचार की नीति चुराने की कोशिश हुई है। TMC की नीति भाजपा के पास चली जाती और भाजपा उससे राजनीति करती। TMC इस डाटा चोरी का विरोध कर रही है
राज्य में एसआईआर प्रक्रिया पर टीएमसी नेता कुणाल घोष कहते हैं, “यहां एसआईआर के नाम पर पूरी तरह से उत्पीड़न हो रहा है। भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए, चुनाव आयोग वैध मतदाताओं को वर्तनी की गलतियों जैसी छोटी-छोटी बातों पर परेशान कर रहा है.बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को बुलाया जा रहा है.नागरिकों द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों को स्वीकार किया जा रहा है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए कोई रसीद नहीं दी जा रही है। सब कुछ बहुत संदिग्ध है.चुनाव आयुक्त को लगता है कि अगर वह भाजपा के इस एजेंडे को पूरा कर देगा, तो प्रधानमंत्री मोदी उसे नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित करेंगे; इसीलिए अमर्त्य सेन को भी निशाना बनाया गया। उन्हें नोटिस भेजा गया। बंगाली अभिनेता दीपक अधिकारी को नोटिस दिया गया। भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को भी नहीं बख्शा गया।”
SIR Controversy:: घटना का पूरा विवरण
टीएमसी नेता और प्रवक्ता कुणाल घोष ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा शुरू की गई SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्यों में मतदाता सूचियों को शुद्ध करने और “अवैध” या “दोहरे” मतदाताओं के नाम हटाने के लिए शुरू की गई है। कुणाल घोष का सबसे महत्वपूर्ण बयान यह है कि “एक भी योग्य या वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं कटना चाहिए।” उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रक्रिया के नाम पर आम जनता या वैध मतदाताओं को परेशान किया गया, तो तृणमूल कांग्रेस (TMC) दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर 1 लाख कार्यकर्ताओं के साथ विशाल विरोध प्रदर्शन करेगी।
कुणाल घोष ने इस पूरी प्रक्रिया की टाइमिंग और मंशा पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग इस काम में बहुत जल्दबाजी कर रहा है और बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) पर अनुचित दबाव डाला जा रहा है। घोष का कहना है कि पिछली बार इसी तरह की प्रक्रिया में दो साल का समय लगा था, लेकिन इस बार इसे मात्र दो महीनों में पूरा करने की कोशिश की जा रही है, जो कि भाजपा के चुनावी हितों को साधने का एक प्रयास हो सकता है। उन्होंने पार्टी समर्थकों और बंगाल की जनता से अपील की है कि वे किसी भी “भाजपा के जाल” में न फंसें और सतर्क रहें।
कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रभारी गुलाम अहमद मीर ने कहा, “यह भाजपा की ओर से फैशन सा बन गया है कि जिस भी राज्य में चुनाव नजदीक आते हैं, वहां वो ED को भेजते हैं। अगर इस(I-PAC) कंपनी पर केस बनता था तो यह कंपनी करीब 10 साल से काम कर रही है, इस तरह की जांच पहले भी हो सकती थी, आज ही क्यों हो रही है?और क्या मजबूरी मुख्यमंत्री की होगी कि वो खुद उस कंपनी में गईं और वहां से फाइलें उठाकर ले गईं, यह बहुत बड़ी चिंता की बात है। पश्चिम बंगाल के लोगों को यह देखना चाहिए कि चुनाव आते आते कैसे भाजपा-TMC आपस में मैच फिकसिंग करते हैं.इस बार पश्चिम बंगाल ने तय कर रखा है कि दोनों सरकारों की विफलताओं को लोग हाईलाइट करेंगे और तीसरे विकल्प का रास्ता बनाएंगे, जिसके लिए हम पिछले 6 महिने से लगातार राज्य के हर जिले, हर ब्लॉक में कांग्रेस को मजबूत करने का काम कर रहे हैं
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