Supreme Court: राज्य बार काउंसिल चुनाव की याचिकाएं सूचीबद्ध न हों; अदालत का निर्देश- शिकायत समिति को भेजें

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Supreme Court: राज्य बार काउंसिल चुनाव की याचिकाएं सूचीबद्ध न हों; अदालत का निर्देश- शिकायत समिति को भेजें: ताजा अपडेट

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Meta Description: Supreme News: Supreme Court: राज्य बार काउंसिल चुनाव की याचिकाएं सूचीबद्ध न हों; अदालत का निर्देश- शिकायत समिति को भेजें – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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Supreme: मुख्य समाचार और अपडेट

Supreme: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्य बार काउंसिल चुनावों से संबंधित किसी भी नई याचिका को सूचीबद्ध न करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि प्रभावित पक्ष अपने शिकायतों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्च स्तरीय चुनाव पर्यवेक्षी समिति के पास जाएं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया को समिति का प्रमुख नियुक्त किया है। समिति में न्यायमूर्ति रवि शंकर झा (पूर्व पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश) और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल चुनावों की समयबद्ध, पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया था कि सभी चुनावों की निगरानी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा की जाए, जिसकी अंतिम समयसीमा 31 जनवरी, 2026 निर्धारित की गई थी।हालांकि, हाल के महीनों में कई याचिकाएं दायर की गईं, जिनमें नाम हटाने, चुनाव में अनियमितताएं और समयसीमा बढ़ाने जैसे मुद्दे उठाए गए। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली भी शामिल थे, जिन्होंने निर्देश दिया कि अब राज्य बार काउंसिल से संबंधित कोई नई याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार नहीं की जाएगी। इसके बजाय, शिकायतों का निपटारा और सुधारात्मक उपाय जस्टिस सुधांशु धूलिया समिति के माध्यम से किया जाएगा।दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिल में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व को अपरिवर्तनीय बताया और किसी भी कमी को सह-नियुक्ति के माध्यम से पूरा करने का निर्देश दिया। साथ ही, अदालत ने विशेष जरूरतों वाले वकीलों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों का समर्थन किया। इसके तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने ऐसे उम्मीदवारों के लिए नामांकन शुल्क में छूट देने का निर्णय लिया।

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