Supreme Court: ‘मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई लिए खतरा’, सोशल मीडिया पर अपलोड पुलिस की वीडियो को लेकर अदालत चिंतित

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Supreme Court: 'मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई लिए खतरा', सोशल मीडिया पर अपलोड पुलिस की वीडियो को लेकर अदालत चिंतित: ताजा अपडेट

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Meta Description: Supreme News: Supreme Court: ‘मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई लिए खतरा’, सोशल मीडिया पर अपलोड पुलिस की वीडियो को लेकर अदालत चिंतित – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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Supreme: मुख्य समाचार और अपडेट

Supreme: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक मामले में सुनवाई के दौरान मोबाइल फोन से शूट किए गए वीडियो को तुरंत सोशल मीडिया पर अपलोड करने को एक गंभीर समस्या बताया। इसके साथ ही इसे निष्पक्ष मुकदमे के लिए बड़ा खतरा भी बताया। कोर्ट की यह टिप्पणी उस पीआईएल पर सुनवाई के दौरान आई, जिसमें आरोप लगाया गया कि पुलिस अक्सर आरोपी के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर देती है, जिससे जनता के मन में पक्षपात पैदा होता है।

इतना ही नहीं पीआईएल में यह भी कहा गया कि पहले ही राज्यों को मीडिया ब्रीफिंग के लिए दिशानिर्देश बनाने को कहा गया है, जो सोशल मीडिया पोस्ट को भी कवर करेगा। इस पर सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि हर व्यक्ति मोबाइल फोन के साथ खुद को मीडिया मानने लगा है। बता दें कि यह टिप्पणी सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली भी शामिल थे।इसके साथ ही सीजेआई सूर्यकांत ने इसे डिजिटल गिरफ्तारी जैसा बताया और कहा कि लोग खुद को मीडिया बताकर अलग तरीके से प्रदर्शित कर रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पीआईएल को फिलहाल वापस ले लिया जाए और अप्रैल के बाद एसओपी लागू होने के बाद व्यापक दायरे के साथ दोबारा दायर किया जाए। कोर्ट के इस सुझाव को वकील ने मान लिया।सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि केवल पुलिस को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया के प्रभाव को रोकना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि मीडिया ट्रायल का खतरा बढ़ रहा है, क्योंकि कुछ प्लेटफॉर्म केवल ऑनलाइन काम कर रहे हैं और लोगों को ब्लैकमेल भी कर सकते हैं। कोर्ट की टिप्पणी के बाद वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि पुलिस कभी-कभी आरोपी को हाथकड़ी में दिखाने, घसीटने या झुकाने जैसी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल देती है, जो व्यक्तिगत सम्मान और निष्पक्षता के लिए खतरा है।

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