Noida Hate Crime: सुप्रीम कोर्ट में UP सरकार ने मानी गलती, कहा- हेट क्राइम मामले में लगनी चाहिए थी धारा 153-बी

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Noida Hate Crime: सुप्रीम कोर्ट में UP सरकार ने मानी गलती, कहा- हेट क्राइम मामले में लगनी चाहिए थी धारा 153-बी: ताजा अपडेट

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Meta Description: Noida News: Noida Hate Crime: सुप्रीम कोर्ट में UP सरकार ने मानी गलती, कहा- हेट क्राइम मामले में लगनी चाहिए थी धारा 153-बी – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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Noida: मुख्य समाचार और अपडेट

Noida: राज्य सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच को बताया कि इस मामले में आईपीसी की धारा 153-बी के तहत केस दर्ज होना चाहिए था। यह धारा उन दावों और आरोपों से संबंधित है जो देश की एकता को चोट पहुंचाते हैं।इससे पहले तीन फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कड़ा सवाल किया था। कोर्ट ने पूछा था कि 2021 के इस मामले में पुलिस ने सही नियम और धाराएं क्यों नहीं लगाईं। नटराज ने बेंच के सामने स्वीकार किया कि पुलिस को शुरुआत में ही धारा 153-बी के तहत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल हो चुकी है।सरकार ने इस स्थिति को सुधारने के लिए एक रास्ता सुझाया है। नटराज ने कहा कि राज्य सरकार संबंधित अदालत में आगे की जांच के लिए एक अर्जी देगी। इसके साथ ही सरकार से मंजूरी लेने के लिए एक प्रस्ताव भी भेजा जाएगा। बेंच ने इस पर अपनी सहमति देते हुए कहा कि सरकार का खुद यह कदम उठाना ज्यादा बेहतर होगा। नटराज ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार एक हफ्ते के भीतर निचली अदालत में आगे की जांच के लिए आवेदन दे देगी।जब याचिकाकर्ता के वकील ने पीड़ित को मुआवजा देने की बात कही, तो बेंच ने स्पष्ट किया कि इसके लिए उन्हें सही कानूनी मंच पर जाना होगा। सुप्रीम कोर्ट एक बुजुर्ग व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस बुजुर्ग ने दावा किया था कि जुलाई 2021 में नोएडा में उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव और मारपीट हुई थी।याचिकाकर्ता के वकील का तर्क है कि इस मामले में धारा 153-बी के साथ-साथ धारा 295-ए भी लगनी चाहिए थी। धारा 295-ए किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वास का अपमान करने से जुड़ी है। याचिका में गौतम बुद्ध नगर के कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया।पीड़ित ने अपनी याचिका में बताया कि चार जुलाई 2021 को कुछ लोगों के समूह ने उनके साथ गाली-गलौज की और उन्हें टॉर्चर किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी दाढ़ी और मुस्लिम पहचान की वजह से उन पर हमला हुआ। हमलावरों ने उनकी धार्मिक पहचान को लेकर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई। अब सरकार के नए कदम से इस मामले में फिर से जांच की उम्मीद जगी है।

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