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Tamil Nadu: सीबीएसई के नए पाठ्यक्रम पर विवाद, CM स्टालिन ने कहा- गैर-हिंदी राज्यों पर भाषा थोपने की कोशिश

josephben1999gd@gmail.com
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Tamil Nadu: सीबीएसई के नए पाठ्यक्रम पर विवाद, CM स्टालिन ने कहा- गैर-हिंदी राज्यों पर भाषा थोपने की कोशिश: ताजा अपडेट

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Meta Description: Tamil News: Tamil Nadu: सीबीएसई के नए पाठ्यक्रम पर विवाद, CM स्टालिन ने कहा- गैर-हिंदी राज्यों पर भाषा थोपने की कोशिश – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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Tamil: मुख्य समाचार और अपडेट

Tamil: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सीबीएसई के नए पाठ्यक्रम ढांचे की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे भाषाई थोपने की सुनियोजित कोशिश बताते हुए आरोप लगाया कि यह नीति हिंदी को बढ़ावा देती है और क्षेत्रीय भाषाओं को कमजोर करती है।

गैर-हिंदी भाषी राज्यों के साथ भेदभाव का आरोप

Tamil: घटना का पूरा विवरण

स्टालिन ने कहा कि यह ढांचा संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाता है, गैर-हिंदी भाषी राज्यों के साथ भेदभाव करता है और छात्रों व शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ डालता है। उन्होंने केंद्र सरकार से भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करने और राज्यों के अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।

तीन-भाषा फॉर्मूले पर क्या बोले?

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दरअसल, सीबीएसी 2026-27 शैक्षणिक सत्र से चरणबद्ध तरीके से तीन-भाषा नीति लागू करने जा रहा है, जिसकी शुरुआत कक्षा 6 से होगी। इस नीति के तहत छात्रों को एक अतिरिक्त भाषा सीखनी होगी और तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी।

Tamil: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विस्तृत पोस्ट में स्टालिन ने कहा कि यह कोई साधारण शैक्षणिक सुधार नहीं है, बल्कि एक चिंताजनक और सुनियोजित प्रयास है, जो हमारी पुरानी आशंकाओं को सही साबित करता है। भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के नाम पर एनडीए सरकार एक केंद्रीकृत एजेंडा चला रही है, जो हिंदी को बढ़ावा देता है और देश की समृद्ध भाषाई विरासत को व्यवस्थित रूप से हाशिये पर डालता है।

The recently unveiled curriculum framework by the Central Board of Secondary Education, aligned with the National Education Policy 2020, is not an innocent academic reform—it is a calculated and deeply concerning attempt at linguistic imposition that vindicates our long-standing… pic.twitter.com/9sTZKVV7md — M.K.Stalin – தமிழ்நாட்டை தலைகுனிய விடமாட்டேன் (@mkstalin) April 4, 2026

उन्होंने तीन-भाषा फॉर्मूले को हिंदी को गैर-हिंदी राज्यों में विस्तार देने का एक छिपा हुआ तंत्र बताया और कहा कि यह नीति संरचनात्मक रूप से हिंदी भाषी छात्रों को लाभ पहुंचाती है, जिससे निष्पक्षता, संघवाद और क्षेत्रीय समानता प्रभावित होती है।स्टालिन ने सवाल उठाया कि दक्षिणी राज्यों के छात्रों के लिए यह नीति व्यवहार में हिंदी को अनिवार्य बना देती है, लेकिन क्या हिंदी भाषी राज्यों में तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम या यहां तक कि बंगाली और मराठी सीखना अनिवार्य किया जाएगा? उन्होंने कहा कि इस तरह की पारस्परिकता का अभाव इस नीति की एकतरफा और भेदभावपूर्ण प्रकृति को उजागर करता है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वही केंद्र सरकार, जो केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों में तमिल को अनिवार्य नहीं बना पाई और पर्याप्त तमिल शिक्षकों की नियुक्ति भी नहीं कर सकी, अब राज्यों को भारतीय भाषाओं के प्रचार का पाठ पढ़ा रही है। यह प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि खुली पाखंडता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु और अन्य राज्यों द्वारा उठाई गई लोकतांत्रिक चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए हिंदी थोपने के लिए प्रतिबद्ध नजर आती है। स्टालिन ने इसे सहकारी संघवाद के सिद्धांतों पर सीधा हमला और करोड़ों भारतीयों की भाषाई पहचान का अपमान बताया।

साथ ही उन्होंने एआईएडीएमके और तमिलनाडु में उसके एनडीए सहयोगियों से सवाल किया कि क्या वे इस थोप जाने का समर्थन करते हैं या छात्रों के अधिकार, पहचान और भविष्य की रक्षा के लिए खड़े होंगे।

संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।


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