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Meta Description: UGC New News: UGC New Rule 2026 Row: UGC नियमों पर रोक लगने पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने किया ये बड़ा दावा! – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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UGC New: मुख्य समाचार और अपडेट
UGC New: केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए हाल में अधिसूचित विवादास्पद नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक का स्वागत करते किया और दावा कि इसके प्रावधान सनातन धर्म को विभाजित करने वाले थे. केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि शीर्ष अदालत का फैसला भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है.
साल 2026 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और समानता बढ़ाने के उद्देश्य से नए Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 नामक नियम बनाए गए थे, जिनका उद्देश्य यह था कि सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इक्विटी कमेटियाँ और शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित हो, ताकि भेदभाव की शिकायतों का प्रभावी समाधान हो सके और सामाजिक समावेशन सुनिश्चित किया जा सके; लेकिन जब ये नियम 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए तो छात्रों, शिक्षकों और राजनीतिक दलों के बीच इन पर तीव्र विवाद शुरू हो गया क्योंकि आलोचकों ने इन नए प्रावधानों को अस्पष्ट, पक्षपाती और भेदभावपूर्ण बताया, खासकर इसलिए कि इन नियमों में जातिगत भेदभाव की परिभाषा सीमित रखी गई थी और उसमें सामान्य श्रेणी (General Category) के छात्रों को संस्थागत संरक्षा से बाहर रखा गया था, जिससे कई लोग मानते थे कि यह नियम एक वर्ग के खिलाफ अन्य वर्गों को बाहर रखकर भेदभाव बढ़ा सकते हैं और गलत इस्तेमाल के विवाद को जन्म दे सकते हैं;
इसी विवाद के चलते कई जनहित याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं और 29 जनवरी 2026 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इन नए यूजीसी नियमों पर रोक (Stay) लगा दी, यह निर्णय यह कहते हुए दिया गया कि नए नियमों की भाषा अस्पष्ट है, उनके दुरुपयोग का खतरा है, और यदि इन्हें बिना समीक्षा लागू किया गया तो वे समाज में विभाजन और तनाव पैदा कर सकते हैं, इसलिए इस रोक के दौरान 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे और अगली सुनवाई के लिए मामला 19 मार्च 2026 तक टाला गया है; इस फैसले से स्पष्ट होता है कि संवैधानिक अधिकारों और समता के सिद्धांतों का संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है, नीति निर्माण में पारदर्शिता और विस्तृत परामर्श होना चाहिए और ऐसा कोई भी नियम जो विभाजन या भेदभाव को बढ़ावा दे सकता हो, उसके प्रभावों की गहन समीक्षा आवश्यक है।
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