SEO MODERATOR PANEL
Focus Keyword: UP: असलहों-गाड़ियों
Meta Description: UP: असलहों-गाड़ियों News: UP: असलहों-गाड़ियों के काफिले के शौक और भौकाल के चक्कर में आर्थक बन गया मनबढ़; जन्मदिन पर निकला था काफिला – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
Suggested Slug: up: असलहों-गाड़ियों-up-news-firing-arthak-and-ujjwal-have-thousands-of-followers-on-instagram-gorakhpur-news-2026-02-23
UP: असलहों-गाड़ियों: मुख्य समाचार और अपडेट
UP: असलहों-गाड़ियों: और पढ़ें Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं
पुलिस सूत्रों का कहना है कि किशोरावस्था से ही आर्थक जन्मदिन, शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में हथियारों और लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ नजर आता था। सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भी हथियारों के साथ तस्वीरें और गाड़ियों के काफिले का प्रदर्शन देखा जा सकता है। विज्ञापन विज्ञापन
UP: असलहों-गाड़ियों: घटना का पूरा विवरण
सूत्रों का दावा है कि कुछ समय पहले गोरखपुर में भी आर्थक कानूनी पचड़ों में फंसते-फंसते बचा था, जहां कथित तौर पर पिता ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि किशोरावस्था से ही आर्थक जन्मदिन, शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में हथियारों और लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ नजर आता था। सोशल मीडिया प्रोफाइल पर भी हथियारों के साथ तस्वीरें और गाड़ियों के काफिले का प्रदर्शन देखा जा सकता है।सूत्रों का दावा है कि कुछ समय पहले गोरखपुर में भी आर्थक कानूनी पचड़ों में फंसते-फंसते बचा था, जहां कथित तौर पर पिता ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया। गोरखपुर में छात्रनेता के घर पर फायरिंग के मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी आर्थक सिंह असलहों-गाड़ियों के काफिले के जरिये सोशल मीडिया पर भौकाल जमाने का शौकीन है। यही भौकाल उसे अपराध के दलदल में ले गया। उसका संबंध बरही के प्रभावशाली परिवार से बताया जा रहा है। उसके पिता क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय हैं।
फेसबुक पर राजनीतिक पहचान बनाने के लिए कई पोस्ट साझा किए
आर्थक सिंह और उसके पिता के फेसबुक वॉल पर बड़े काफिले, लग्जरी एसयूवी और असलहाधारियों के साथ तस्वीरें पोस्ट की जाती रही हैं। राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश में आर्थक के नाम से कई पोस्ट साझा किए गए, जिनमें खुद को भावी नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया। तस्वीरों में भीड़, गाड़ियों की लंबी कतार और हथियारों का खुला प्रदर्शन साफ दिखाई देता है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस तरह का सार्वजनिक प्रदर्शन युवाओं में गलत संदेश देता है और कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।
UP: असलहों-गाड़ियों: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
करीब चार साल पहले अपने जन्मदिन पर आर्थक सिंह तारामंडल से अपने गांव तक गाड़ियों के लंबे काफिले के साथ गया था। आरोप है कि इस दौरान ट्रैफिक नियमों की अनदेखी की गई और खुली गाड़ियों में हथियार लहराए गए। मामले की शिकायत सोशल मीडिया पर होने के बाद पुलिस ने संज्ञान लिया था। सूत्रों के मुताबिक, उस समय आर्थिक जुर्माना लगाकर प्रकरण का निस्तारण कर दिया गया था।
आर्थक और उज्जवल के इंस्टाग्राम पर हजारों फॉलोवर
आर्थक और उज्जवल इंस्टाग्राम पर काफी सक्रिय हैं। हजारों की संख्या में उनके फॉलोवर हैं। दोनों समर्थकों के साथ तस्वीरें, लग्जरी गाड़ियां और कार्यक्रमों की झलकियां सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं। जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता और प्रभाव क्षेत्र को लेकर भी प्रतिस्पर्धा थी। पोस्ट और रील्स के जरिये शक्ति प्रदर्शन की होड़ ने भी रिश्तों में खटास को बढ़ाया।
जेल से छूटते ही फिर बढ़ी तनातनी
मामले में नामजद आरोपी महेश चौधरी बीते बृहस्पतिवार को ही जेल से जमानत पर छूटा था। बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात वह फिर से आर्थक सिंह और अन्य साथियों के साथ सक्रिय हो गया। पुलिस के अनुसार, फायरिंग की घटना के दौरान महेश ने भी दो राउंड गोली चलाई। महेश चौधरी इससे पहले बेतियाहाता स्थित एक डोसा दुकान संचालक के अपहरण के मामले में जेल जा चुका है।
असलहा देने वालों का पता लगा रही पुलिस
छात्रनेता उज्ज्वल यादव के घर शुक्रवार रात हुई फायरिंग के मामले में पुलिस अब घटना की तह तक पहुंचने में जुटी है। कोतवाली पुलिस मुख्य आरोपी आर्थक प्रताप सिंह और उसके साथियों को असलहा उपलब्ध कराने वाले स्रोत की पड़ताल कर रही है।
संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।
ताजा खबरों के लिए upkhabarhindi.com के साथ बने रहें।
मूल खबर यहाँ पढ़ें (Read Original)
