UP: 7 साल की मासूम को बनाया शिकार; 77 घंटे बाद पिंजरे में कैद हुआ खूंखार तेंदुआ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

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UP: 7 साल की मासूम को बनाया शिकार; 77 घंटे बाद पिंजरे में कैद हुआ खूंखार तेंदुआ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस: ताजा अपडेट

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Meta Description: UP: 7 News: UP: 7 साल की मासूम को बनाया शिकार; 77 घंटे बाद पिंजरे में कैद हुआ खूंखार तेंदुआ, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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UP: 7: मुख्य समाचार और अपडेट

UP: 7: बेलरायां वन रेंज के फुटहा फार्म इलाके में दहशत का पर्याय बना तेंदुआ आखिरकार 77 घंटे बाद वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। सात वर्षीय मासूम सिमरन को शिकार बनाने वाले तेंदुए को पकड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान में शनिवार देर रात सफलता मिल गई। तेंदुए के पकड़े जाने की खबर मिलते ही क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने फुटहा फार्म समेत सिंधौना, रमुआपुर और दलराजपुर गांवों में व्यापक अभियान चलाया था। पांच पिंजरे लगाए गए थे, जिनमें बकरियों को चारे के रूप में बांधा गया। इसके अलावा ट्रैप कैमरे और ड्रोन की मदद से 24 घंटे निगरानी की जा रही थी।बुधवार शाम फुटहा फार्म निवासी जोगा सिंह की सात वर्षीय बेटी सिमरन घर में खेल रही थी। इसी दौरान तेंदुआ घर में घुस आया और बच्ची को उठाकर खेतों की ओर भाग गया। परिजन और ग्रामीण कुछ समझ पाते, उससे पहले ही घटना हो चुकी थी। बाद में बच्ची का क्षत-विक्षत शव खेत में मिला, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। लोगों ने वन विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया था। डीएफओ कीर्ति चौधरी के निर्देश पर एसडीओ एसडीओ मनोज तिवारी के निर्देशन में बेलरायां रेंजर भूपेंद्र सिंह, लुधौरी रेंजर मोबीन आरिफ समेत स्पेशल टीम 24 घंटे इलाके में डटी रही। करीब 48 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुआ पिंजरे में फंस गया। करीब 77 घंटे की मशक्कत के बाद शनिवार रात करीब 11 बजे तेंदुआ पिंजरे में कैद हो गया।तेंदुए के पकड़े जाने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और वन विभाग की टीम का आभार जताया। रेंजर भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पकड़े गए तेंदुए को वन रेंज कार्यालय लाया जा रहा है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर उसका मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा, जिसके बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा। साथ ही क्षेत्र में निगरानी जारी रखी जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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