महिला को मृत घोषित किया, यह सरकारी सिस्टम की सबसे बुरी विफलता है।

By Deepak Pandit 6 Min Read
महिला को मृत घोषित किया, यह सरकारी सिस्टम की सबसे बुरी विफलता है।

महिला को मृत घोषित किया, यह सरकारी सिस्टम की सबसे बुरी विफलता है।

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो सरकारी तंत्र की गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता को उजागर करता है। यहाँ एक विधवा महिला, जो अपने पति की मृत्यु के बाद उनका मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही थी, उसे खुद ही मृत घोषित कर दिया गया। यह कहानी सिर्फ एक लिपिकीय त्रुटि नहीं, बल्कि एक जीवित इंसान के अस्तित्व को मिटाने की दर्दनाक दास्तां है। इस एक गलती ने महिला की पूरी दुनिया उजाड़ दी, उसका आधार कार्ड ब्लॉक हो गया और उसे मिलने वाली विधवा पेंशन भी बंद हो गई। अब वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए दर-दर भटक रही है।

क्या है यह दिल दहला देने वाला पूरा मामला?

यह मामला फिरोजाबाद के टूंडला तहसील क्षेत्र के गांव नगला दुले का है। यहाँ रहने वाली रोशनी नाम की महिला के पति की बीमारी के चलते पिछले साल मृत्यु हो गई थी। अपने पति की मृत्यु के बाद, वह सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और अन्य औपचारिकताओं के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का प्रयास कर रही थी। इसके लिए उन्होंने नगर निगम में आवेदन किया। लेकिन जिस सिस्टम से उन्हें मदद की उम्मीद थी, उसी सिस्टम ने उनके साथ सबसे बुरा मजाक कर दिया। नगर निगम के कर्मचारियों ने एक भयानक गलती करते हुए, उनके पति की जगह रोशनी को ही मृत दर्ज कर दिया।

यूपी में सरकारी लापरवाही की एक दर्दनाक मिसाल

यह घटना यूपी में सरकारी लापरवाही का एक जीवंत उदाहरण है। जब रोशनी को इस गलती का पता चला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें बताया गया कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, अब वह जीवित नहीं हैं। इस लापरवाही का असर तुरंत उनके जीवन पर पड़ा। उनका आधार कार्ड, जो आज भारत में हर नागरिक की पहचान का सबसे बड़ा सबूत है, उसे ब्लॉक कर दिया गया। आधार कार्ड के बिना किसी भी सरकारी योजना का लाभ लेना या बैंक से लेनदेन करना लगभग असंभव है। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ एक जीवित व्यक्ति को सिस्टम ने पूरी तरह से अदृश्य बना दिया है। यूपी की अन्य दर्दनाक कहानियों और समाचारों के लिए आप हमारे होमपेज पर जा सकते हैं।

आधार कार्ड ब्लॉक और पेंशन बंद: दोहरी मार

जब एक महिला को मृत घोषित किया जाता है, तो इसका असर सिर्फ उसकी पहचान तक सीमित नहीं रहता। रोशनी के लिए यह एक दोहरी मार थी। आधार कार्ड ब्लॉक होने के साथ ही, उन्हें सरकार से मिलने वाली विधवा पेंशन भी बंद कर दी गई। यह पेंशन उनके और उनके परिवार के लिए आर्थिक सहारे का एक महत्वपूर्ण जरिया थी। अब वह न केवल अपनी पहचान के लिए लड़ रही हैं, बल्कि अपने परिवार का पेट पालने के लिए भी संघर्ष कर रही हैं। यह दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी प्रशासनिक चूक किसी गरीब और कमजोर व्यक्ति के जीवन में भूचाल ला सकती है।

“मैं जिंदा हूं!”: अधिकारियों के सामने जिंदा साबित करने की जंग

अपनी पहचान वापस पाने और खुद को जिंदा साबित करने के लिए रोशनी ने अधिकारियों के चक्कर काटने शुरू कर दिए। यह उनके लिए जिंदा साबित करने की जंग बन चुकी है। वह हर दरवाजे पर जाकर गुहार लगा रही हैं, “साहब, मैं जिंदा हूं!” लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। अधिकारी उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग में भेज रहे हैं, और कोई भी इस गंभीर गलती की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। इस प्रक्रिया में उन्हें न केवल मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है, बल्कि आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ रहा है। उनका संघर्ष उस हर आम नागरिक के दर्द को बयां करता है जो सरकारी दफ्तरों के चक्रव्यूह में फंस जाता है।

मामले का संज्ञान और आगे की कार्रवाई

जब यह मामला मीडिया के माध्यम से उच्च अधिकारियों तक पहुंचा, तो हड़कंप मच गया। नगर निगम के आयुक्त ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जो भी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा है कि रोशनी के रिकॉर्ड को जल्द से जल्द ठीक किया जाएगा ताकि उनका आधार कार्ड फिर से सक्रिय हो सके और उनकी पेंशन बहाल हो सके। हालांकि, यह देखना बाकी है कि यह आश्वासन कितनी जल्दी हकीकत में बदलता है और रोशनी को कब तक न्याय मिलता है।

निष्कर्ष: एक सबक जो सिस्टम को सीखना चाहिए

रोशनी की कहानी सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे प्रशासनिक ढांचे पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा सिस्टम इतना कमजोर और असंवेदनशील कैसे हो सकता है कि वह एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दे। इस मामले से यह सबक लेना जरूरी है कि प्रौद्योगिकी और डेटा के इस युग में, मानवीय संवेदना और जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उम्मीद है कि रोशनी को जल्द ही न्याय मिलेगा और भविष्य में किसी और नागरिक को इस तरह की दर्दनाक पीड़ा से नहीं गुजरना पड़ेगा

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Deepak Pandit एक अनुभवी पत्रकार और UPKhabarHindi.com के संस्थापक हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश और भारत से जुड़ी सैकड़ों खबरें कवर की हैं। 166K+ फेसबुक फॉलोअर्स के साथ Deepak Pandit डिजिटल मीडिया में एक विश्वसनीय नाम हैं। उनका उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और जनहित की पत्रकारिता करना है। 📧 deepak@upkhabarhindi.com | 🌐 UPKhabarHindi.com
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