West Bengal: ‘अमर्त्य सेन, शमी और देव को भेजे गए नोटिस जांच का हिस्सा’, SIR समन पर बवाल के बीच CEO की सफाई

By Deepak Pandit 4 Min Read
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West Bengal: 'अमर्त्य सेन, शमी और देव को भेजे गए नोटिस जांच का हिस्सा', SIR समन पर बवाल के बीच CEO की सफाई: ताजा अपडेट

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West: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चर्चा और सियासत दोनों तेज है। वहीं अब राज्य में चर्चित नामों को भेजे गए चुनावी नोटिस पर उठे विवाद के बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने स्थिति स्पष्ट की है। कार्यालय ने साफ किया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, क्रिकेटर मोहम्मद शमी और तृणमूल सांसद देव को को भेजे गए विशेष गहन संशोधन सुनवाई के नोटिस किसी को निशाना बनाकर नहीं भेजे गए थे, बल्कि यह पूरी तरह नियमित और नियमों के तहत की गई चुनावी जांच प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

दरअसल, इन प्रसिद्ध लोगों को नोटिस मिलने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विवाद खड़ा हो गया था। इस पर सफाई देते हुए सीईओ कार्यालय ने कहा कि इन सभी मतदाताओं के गणना फॉर्म में जरूरी जानकारी अधूरी थी।सीईओ कार्यालय के अनुसार, जांच के दौरान पाया गया कि संबंधित मतदाताओं ने अपने फॉर्म में अनिवार्य ‘लिंकेज कॉलम’ खाली छोड़ दिए थे। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, अगर फॉर्म में ऐसी कोई कमी या गड़बड़ी पाई जाती है, तो स्वचालित रूप से सुनवाई का नोटिस जारी किया जाता है। इसी बात को लेकर कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में लिखा कि गणना प्रपत्र में साफ तौर पर दिख रहा है कि मतदाता द्वारा लिंकेज कॉलम खाली छोड़े गए हैं।अमर्त्य सेन के मामले में सीईओ कार्यालय ने बताया कि उन्होंने ओवरसीज वोटर (विदेश में रहने वाले मतदाता) के रूप में अपना फॉर्म जमा किया था। यह फॉर्म उनके एक परिजन शांतभानु सेन ने रिसीव किया और उसमें अमर्त्य सेन को उनकी मां अमिता सेन से जोड़ा गया। लेकिन समस्या यह थी कि अमर्त्य सेन और उनकी मां की उम्र में अंतर 15 साल से कम दिखाया गया। कार्यालय ने इसे एक तार्किक गड़बड़ी थी।इसी वजह से ईआरओ नेट पोर्टल ने इस मामले को डिस्क्रेपेंसी के रूप में चिन्हित किया और नियमों के अनुसार नोटिस जारी हो गया।

West: घटना का पूरा विवरण

कार्यालय ने साफ कहा कि डॉ. अमर्त्य सेन को नोटिस अन्य समान मामलों की तरह ही भेजा गया, इसमें कोई अलग व्यवहार नहीं किया गया। सीईओ कार्यालय ने यह भी बताया कि अमर्त्य सेन की उम्र 85 वर्ष से अधिक होने के कारण, उन्हें दफ्तर बुलाने के बजाय ERO/AERO और BLO खुद उनके घर गए। वहीं जाकर सारी औपचारिकताएं पूरी की गईं।

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सीईओ कार्यालय ने अंत में स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार की गई। किसी भी व्यक्ति के साथ विशेष या चयनित व्यवहार नहीं किया गया। सभी मामलों में एक जैसा और समान नियम लागू किया गया।

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