मुरादाबाद: माफ करना बेटियों… तुम्हारी मौत भी अफसरों की नींद नहीं तोड़ पाई, दो बेटियों की कुत्तों ने ली जान

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मुरादाबाद: माफ करना बेटियों... तुम्हारी मौत भी अफसरों की नींद नहीं तोड़ पाई, दो बेटियों की कुत्तों ने ली जान: ताजा अपडेट

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मुरादाबाद:: मुख्य समाचार और अपडेट

मुरादाबाद:: उन मासूम बेटियों को नहीं मालूम था कि उछल-कूद के दिनों में उन्हें कुत्ते घसीटेंगे। पैने दांत और कीले गढ़ाकर उनके नाजुक शरीर को लहूलुहान कर डालेंगे। यही नहीं तड़पते शरीर से हाथ और पैर अलग करके खा जाएंगे। अब उन्हें खेल-कूद से थकने के बाद मां की गोद मयस्सर नहीं होगी।

घर ही नहीं, दुनिया से भी जुदा होना पड़ेगा। मां के आंचल की जगह मिट्टी उनका बिछौना और कफन उनकी ओढ़नी बनेगी…और समझदारी की उम्र पर पहुंचने से पहले ही उन्हें दफन कर दिया जाएगा। डिलारी के काजीपुरा गांव की चार साल की नुरसद और संभल के पौटा गांव में नौ वर्षीय रिया पर ऐसी ही गुजरी।सोमवार की शाम घर के बाहर खेलती नुरसद और 11 जनवरी को रिया ने यह सब झेला। महज नौ दिन में इन दो बच्चियों की जिंदगी का जिस तरह घिसट-घिसटकर अंत हुआ, उसकी कल्पना से ही किसी की भी रूह कांप जाए।लेकिन वाह री अफसरशाही हंसने-खेलने के दिनों में लापरवाही की भेंट चढ़ीं इन दो बेटियों के माता-पिता के आंसू पोंछने की कोशिश तक किसी स्तर से नहीं की गई। न ही बड़ी आपदा बन चुके कुत्तों के झुंडों को दूर बाड़े में कैद करने की पहल हुई, ताकि भविष्य में बाहर खेलते या राह चलते बच्चों को महफूज किया जा सके।

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