अमर उजाला शब्द सम्मान- 2025: उस्ताद शुजात खान के सान्निध्य में 11 फरवरी को होगा शब्द साधकों का सम्मान

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अमर उजाला शब्द सम्मान- 2025: उस्ताद शुजात खान के सान्निध्य में 11 फरवरी को होगा शब्द साधकों का सम्मान: ताजा अपडेट

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अमर उजाला: मुख्य समाचार और अपडेट

अमर उजाला शब्द सम्मान-2025 का आयोजन नई दिल्ली के जनपथ स्थित अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के भीम सभागार में शाम 5:30 बजे से शुरू होगा। समारोह में उस्ताद शुजात हुसैन खान विजेताओं को सम्मानित करेंगे और सितार वादन की प्रस्तुति देंगे। कार्यक्रम में प्रवेश केवल निमंत्रण पत्र के आधार पर मिलेगा। इस आयोजन में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रमुख रचनाकारों को अलग-अलग श्रेणियों में सम्मान दिया जाएगा।इस वर्ष का सर्वोच्च शब्द सम्मान ‘आकाशदीप’ हिंदी की प्रख्यात कथाकार ममता कालिया और मणिपुरी भाषा की विख्यात रचनाकार अरमबम ओंगबी मेमचौबी को दिया जाएगा। यह सम्मान साहित्य में जीवन भर के समग्र योगदान के लिए दिया जाता है। सम्मान के तहत पांच-पांच लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और गंगा प्रतिमा भेंट की जाएगी। दोनों लेखिकाओं को उनके मजबूत स्त्री दृष्टिकोण और सामाजिक सरोकार वाले लेखन के लिए जाना जाता है।वर्ष 2025 के लिए श्रेष्ठ कृति सम्मान भी घोषित किए गए हैं। कविता श्रेणी में सविता सिंह, कथेतर लेखन में नाइश हसन, कथा श्रेणी में शहादत को सम्मान मिलेगा। पहली पुस्तक के लिए मनीष यादव को चुना गया है। अनुवाद के लिए भाषाबंधु सम्मान सुजाता शिवेन को दिया जाएगा। इन सम्मानों का उद्देश्य नई और महत्वपूर्ण रचनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना है।शब्द सम्मान की शुरुआत वर्ष 2018 में भारतीय भाषाओं के सामूहिक स्वप्न को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी। आयोजन से जुड़े संयोजक यशवंत व्यास के अनुसार यह सम्मान हिंदी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों को भी बराबर मंच देता है। अब तक कन्नड़, मराठी, बांग्ला, उड़िया, मलयालम और गुजराती भाषा के रचनाकारों को भी आकाशदीप से सम्मानित किया जा चुका है। इस वर्ष मणिपुरी भाषा को शामिल किया गया है।इस बार दोनों सर्वोच्च सम्मान महिला रचनाकारों को दिए जा रहे हैं, जिससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया है। ममता कालिया ने हिंदी साहित्य में मध्यवर्ग और स्त्री पहचान के सवालों को मजबूत स्वर दिया है। अरमबम ओंगबी मेमचौबी ने मणिपुरी साहित्य और लोक परंपराओं पर उल्लेखनीय काम किया है। समारोह साहित्य, भाषा और सृजन की विविध परंपराओं को एक मंच पर लाने का प्रयास है।

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