अयोध्या: राष्ट्रपति ने राम मंदिर में की दिव्य श्रीराम यंत्र की स्थापना, स्थानीय सांसद को नहीं मिला निमंत्रण

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अयोध्या: राष्ट्रपति ने राम मंदिर में की दिव्य श्रीराम यंत्र की स्थापना, स्थानीय सांसद को नहीं मिला निमंत्रण: ताजा अपडेट

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अयोध्या:: मुख्य समाचार और अपडेट

अयोध्या:: जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, अस्थिरता और भय का माहौल है, उसी समय अयोध्या से शांति, आस्था और रामराज्य का संदेश गूंजा। श्रीराम यंत्र स्थापना के अनुष्ठान अवसर पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरयू का पावन प्रवाह अयोध्या को निरंतर पवित्र करता है। आज यहां उपस्थित होकर हजारों लोग भयमुक्त वातावरण में रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में युद्ध चल रहे हैं, लेकिन हम यहां श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठा में सहभागी बन रहे हैं, यह भारत की आत्मा है।

मुख्यमंत्री ने बदलती सामाजिक सोच पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी अब भटकाव से दूर होकर अपनी जड़ों की ओर लौट रही है। अब लोग नववर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाते हैं, न कि ऐसे पर्यटन स्थलों पर जहां सनातन के विरोध में गतिविधियां होती हैं। मुख्यमंत्री ने श्रीराम मंदिर निर्माण की पूरी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भूमि पूजन से लेकर रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा और अब श्रीराम यंत्र स्थापना तक का हर चरण करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व और आनंद का विषय है।

अयोध्या:: घटना का पूरा विवरण

मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर 156 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे। अयोध्या, काशी, प्रयागराज और मथुरा-वृंदावन में उमड़ी यह भीड़ बताती है कि भारत की आध्यात्मिक धारा अब और प्रबल हो रही है। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन में योगदान देने वाले संतों, रामभक्तों और कारीगरों को नमन किया। उन्होंने विशेष रूप से दिवंगत विहिप नेता अशोक सिंघल सहित उन सभी को याद किया, जिनके प्रयासों से यह स्वप्न साकार हुआ।

आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया था

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग कभी राम मंदिर, काशी और मथुरा की आस्था को अंधविश्वास बताते थे, वही लोग अपने राजनीतिक हितों के लिए अलग मानदंड अपनाते रहे। कहा कि आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया था। इसे अपमानित करने वाले वही लोग हैं, जो सत्ता बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे। नोएडा न जाना उनके लिए अंधविश्वास नहीं था, लेकिन राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, कृष्ण-कन्हैया के मथुरा-वृंदावन की बात करना अंधविश्वास का पर्याय था। लेकिन जो आस्था 500 वर्ष तक निरंतर बनी रही, संघर्षों का मुकाबला करती रही, वह न रुकी, न डिगी और न झुकी। आस्था को अपमानित करने वाली सत्ता के खिलाफ संघर्ष निरंतर जारी रहा। अंततः वह दिन आया, जब अयोध्या इस रूप में सबके सामने है।

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