स्कूलों में ‘मनाचे श्लोक’ पढ़ाने पर रार: पूर्व बीएमसी मेयर का प्रस्ताव, AIMIM बोली-धर्म नहीं, संविधान पढ़ाओ

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स्कूलों में 'मनाचे श्लोक' पढ़ाने पर रार: पूर्व बीएमसी मेयर का प्रस्ताव, AIMIM बोली-धर्म नहीं, संविधान पढ़ाओ: ताजा अपडेट

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स्कूलों: मुख्य समाचार और अपडेट

स्कूलों: पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने बीएमसी कमिश्नर को एक नोटिस भेजा है। इसमें उन्होंने मांग की है कि जिन स्कूलों में मराठी भाषा एक अनिवार्य विषय के तौर पर पढ़ाई जाती है, वहां हर दिन ‘मनाचे श्लोक’ का पाठ जरूरी किया जाए।प्रस्ताव में दलील दी गई है कि समर्थ रामदास स्वामी रचित ये श्लोक बेहद सरल भाषा में हैं। इनके पाठ से बच्चों में अच्छे संस्कार आएंगे, मानसिक अनुशासन बढ़ेगा और उनका बौद्धिक विकास होगा। पेडनेकर का कहना है कि आज के दौर में बच्चे बहुत तनाव में रहते हैं, ऐसे में यह श्लोक उनके तनाव को कम करने और उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित होंगे। उन्होंने इसके लिए बाकायदा स्कूल के टाइम-टेबल में एक निश्चित समय तय करने की बात कही है।जैसे ही यह प्रस्ताव सामने आया, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने इस पर ऐतराज जताया। बीएमसी में एआईएमआईएम गुट के नेता विजय उबाले ने कहा कि हमारे सरकारी स्कूल धर्मनिरपेक्ष हैं। किसी खास धर्म या संप्रदाय से जुड़े आध्यात्मिक साहित्य को सभी बच्चों पर थोपना गलत है।उबाले ने कहा कि अगर बच्चों को कुछ सिखाना ही है, तो स्कूलों में भारत का संविधान पढ़ाया जाना चाहिए। इससे बच्चे देश के अच्छे नागरिक बनेंगे और अपने अधिकारों व कर्तव्यों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। किशोरी पेडनेकर ने नगर निगम आयुक्त से मांग की है कि वो इस प्रस्ताव की व्यवहार्यता की जांच करें और एक रिपोर्ट सौंपें। यह प्रस्ताव आने वाली बीएमसी की जनरल बॉडी मीटिंग में चर्चा के लिए रखा जा सकता है, जहां इस पर जोरदार बहस होने के पूरे आसार हैं।

संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।


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