2011 मुंबई धमाका मामला: आरोपियों को 15 साल बाद जमानत, अदालत ने कहा- शीघ्र सुनवाई का अधिकार सिर्फ कागजी नहीं

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2011 मुंबई धमाका मामला: आरोपियों को 15 साल बाद जमानत, अदालत ने कहा- शीघ्र सुनवाई का अधिकार सिर्फ कागजी नहीं: ताजा अपडेट

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Meta Description: 2011 News: 2011 मुंबई धमाका मामला: आरोपियों को 15 साल बाद जमानत, अदालत ने कहा- शीघ्र सुनवाई का अधिकार सिर्फ कागजी नहीं – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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2011: मुख्य समाचार और अपडेट

2011: मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर नवंदर ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब मुकदमा खत्म होने के आसार जल्द नजर न आ रहे हों। अदालत ने कहा कि ‘त्वरित सुनवाई’ का अधिकार केवल कानून की किताबों में लिखने के लिए नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर उतारना भी जरूरी है।हैरानी की बात यह है कि 2011 में हुई इन गिरफ्तारियों के आठ साल बाद, यानी 2019 में जाकर आरोप तय किए गए थे। हालांकि अब इस मामले की सुनवाई दैनिक आधार पर चल रही है, लेकिन इसकी रफ्तार अब भी चिंता का विषय है।अदालत के सामने पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक,अब तक कुल 203 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अभी भी 100 से अधिक गवाहों से पूछताछ बाकी है। मुकदमे की वर्तमान गति को देखते हुए इसे पूरा होने में अभी कई साल और लग सकते हैं। इसी आधार पर अदालत ने माना कि आरोपियों को और अधिक समय तक सलाखों के पीछे रखना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।अदालत ने यह भी गौर किया कि बॉम्बे हाईकोर्ट पहले ही इस मामले के अन्य सह-आरोपियों को इसी तरह की देरी के आधार पर जमानत दे चुका है। समानता के सिद्धांत को बरकरार रखते हुए, विशेष मकोका अदालत ने नकी अहमद और हारून नायक को 1,00,000 रुपये के निजी मुचलके और कुछ सख्त शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया।13 जुलाई 2011 को मुंबई एक बार फिर दहल उठी थी। शहर के ओपेरा हाउस, जवेरी बाजार और दादर जैसे व्यस्त इलाकों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इस आतंकी हमले में 27 मासूमों की जान गई थी। वहीं, 130 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

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