Chandra Grahan 2026: लखनऊ में चंद्रग्रहण दिखा, नक्षत्रशाला में टेलिस्कोप से दिखाया जा रहा; देखने को उमड़ी भीड़

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Chandra Grahan 2026: लखनऊ में चंद्रग्रहण दिखा, नक्षत्रशाला में टेलिस्कोप से दिखाया जा रहा; देखने को उमड़ी भीड़: ताजा अपडेट

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Meta Description: Chandra News: Chandra Grahan 2026: लखनऊ में चंद्रग्रहण दिखा, नक्षत्रशाला में टेलिस्कोप से दिखाया जा रहा; देखने को उमड़ी भीड़ – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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Chandra: मुख्य समाचार और अपडेट

Chandra: इस वर्ष का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को पड़ रहा है। ग्रहण के कारण होली से जुड़ा कार्य नहीं होगा। यह एक ग्रस्तोदय चंद्रग्रहण होगा जो भारत के कुछ हिस्सों में दिखेगा। चंद्रग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। ग्रहण का प्रारंभ भारत के किसी स्थान में दिखाई नहीं देगा क्योंकि चंद्रोदय होने से पूर्व ग्रहण प्रारंभ हो जाएगा। राजधानी लखनऊ में 6.30 बजे से चंद्र ग्रहण जारी है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान स्थित नक्षत्रशाला में टेलिस्कोप से चंद्र ग्रहण दिखाया जा रहा है।

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Chandra: घटना का पूरा विवरण

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि खग्रास चंद्रग्रहण का मोक्ष भारत के सुदूर पूर्वी भागों में दिखाई देगा। देश के बाकी हिस्सों में खंड चंद्रग्रहण का मोक्ष ही दिखाई देगा। तीन मार्च को चंद्रोदय शाम 06:12 बजे पर होगा। तीन मार्च को सूतक प्रात: 09:20 बजे से शाम 06:46 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में दिखाई देगा। चंद्रोदय के समय ग्रहण का अंत रूस, कजाकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, मालदीव और हिंद महासागर में दिखाई देगा। यह ग्रहण सूर्य की राशि सिंह और पूर्वा फागुनी नक्षत्र में लगेगा। विज्ञापन विज्ञापन

ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि खग्रास चंद्रग्रहण का मोक्ष भारत के सुदूर पूर्वी भागों में दिखाई देगा। देश के बाकी हिस्सों में खंड चंद्रग्रहण का मोक्ष ही दिखाई देगा। तीन मार्च को चंद्रोदय शाम 06:12 बजे पर होगा। तीन मार्च को सूतक प्रात: 09:20 बजे से शाम 06:46 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में दिखाई देगा। चंद्रोदय के समय ग्रहण का अंत रूस, कजाकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, मालदीव और हिंद महासागर में दिखाई देगा। यह ग्रहण सूर्य की राशि सिंह और पूर्वा फागुनी नक्षत्र में लगेगा।

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मंदिर में प्रवेश और मूर्ति स्पर्श भी वर्जित एसएस नागपाल के अनुसार, सूतक लग जाने पर मंदिर में प्रवेश करना मूर्ति को स्पर्श करना, भोजन करना, यात्रा आदि करना वर्जित है। बच्चे, वृद्ध और रोगी अति आवश्यक होने पर भोजन ले सकते हैं। भोजन सामग्री जैसे दूध, दही, घी इत्यादि में कुश या तुलसी का पत्ता रख देना चाहिए। ग्रहण मोक्ष के बाद पीने का पानी ताजा ले लेना चाहिए। गर्भवती महिलाएं पेट पर गाय के गोबर का पतला लेप लगा सकती हैं। ग्रहण अवधि में गर्भवती महिलाओं को नुकीली या धारदार वस्तुओं जैसे सुई, चाकू, कैंची आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इनका उपयोग गर्भस्थ शिशु पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। कुछ आध्यात्मिक उपाय भी इस समय लाभकारी माने जाते हैं। ग्रहण के दौरान ओम नमः शिवाय या इष्ट देव का स्मरण, मंत्र जप और विशेष रूप से चंद्र से संबंधित मंत्रों का उच्चारण सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।

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