Energy Security: घरेलू उत्पादन-नए स्रोतों से ऊर्जा क्षेत्र मजबूत, सरकार ने बाहरी झटकों से सुरक्षा सुनिश्चित की

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Energy Security: घरेलू उत्पादन-नए स्रोतों से ऊर्जा क्षेत्र मजबूत, सरकार ने बाहरी झटकों से सुरक्षा सुनिश्चित की: ताजा अपडेट

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Meta Description: Energy News: Energy Security: घरेलू उत्पादन-नए स्रोतों से ऊर्जा क्षेत्र मजबूत, सरकार ने बाहरी झटकों से सुरक्षा सुनिश्चित की – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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Energy: मुख्य समाचार और अपडेट

Energy: सामान्यत: शांतिकाल के दौरान संरचनात्मक ऊर्जा बदलाव बहुत कम होते हैं। ये तब होते हैं जब कोई संकट इतना अधिक बढ़ जाता है कि उसे नजरअंदाज करना लगभग असंभव हो जाता है। हालांकि पिछले 11 वर्षों के दौरान मोदी सरकार ने इस अवधारणा के विपरीत काम किया। सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र में संरचनात्मक परिवर्तन तब भी किए, जब हालात ऐसे कदम उठाने के लिए बाध्य नहीं कर रहे थे। इससे भारत को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं में आने वाली बाधाओं को झेलने की अधिक क्षमता विकसित करने में मदद मिली। घरेलू उत्पादन का विस्तार कर, ऊर्जा के नए स्रोतों की ओर बदलाव को व्यवस्थित कर और आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाकर सरकार ने देश की ऊर्जा जरूरतों को बाहरी झटकों से लगने वाले नुकसान को कम किया। सरकार की रणनीति तीन स्तंभों पर आधारित थी।

प्रयासों और नीतिगत फोकस के परिणामस्वरूप पेट्रोल में इथनॉल मिश्रण 2014 के 1.5 फीसदी से बढ़कर 2025 में 20 फीसदी हो गई, जो 11 वर्षों में 13 गुना की वृद्धि है।

Energy: घटना का पूरा विवरण

इथनॉल का उत्पादन 2014 में 38 करोड़ लीटर से बढ़कर जून 2025 तक 661.1 करोड़ लीटर हो गया।

20 फीसदी इथनॉल मिश्रण कार्यक्रम अब सालाना लगभग 4.4 करोड़ बैरल कच्चे तेल की जगह लेता है।

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पेट्रोल में इथनॉल मिलाने का काम 2001 में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ। फिर भी कई वर्षों तक भारत ने कोई प्रगति नहीं की और इथनॉल का उत्पादन स्थिर बना रहा। 2014 के बाद ही व्यापक सुधारों की एक शृंखला के जरिये भारत इसमें सक्षम हो सका। इथनॉल मिश्रण प्रोग्राम (ईबीपी) के तहत पेट्रोल में 20% इथनॉल मिलाने का लक्ष्य शुरू में 2030 के लिए निर्धारित किया गया था। हालांकि, 2020 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने इस लक्ष्य को 2025 तक घटा दिया।

Energy: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

ऊर्जा संक्रमण को सही ढंग से आगे बढ़ाना

मोदी सरकार ने सभी स्तरों पर देश के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) उद्योग के विकास का समर्थन किया। इसने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 100% एफडीआई की अनुमति दी, जिसने पिछले चार वर्षों में 36 अरब डॉलर का एफडीआई आकर्षित किया है। ऑटोमोबाइल निर्माण क्षेत्र में तकनीकी इनोवेशन को बढ़ावा देने और आपूर्ति शृंखला क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की गईं। भारत में हाइब्रिड व ईवी को तेजी से अपनाने तथा उनके निर्माण (फेम-1) की शुरुआत 2015 में की गई थी। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिक व हाइब्रिड वाहन तकनीक को अपनाने और उसके निर्माण को बढ़ावा देना तथा इस क्षेत्र के सतत विकास को सुनिश्चित करना था।

इस योजना के पहले चरण में करीब 2.78 लाख ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) जोड़े गए। इसके परिणामस्वरूप करीब 5.9 करोड़ लीटर ईंधन की बचत हुई।

उपभोक्ताओं (खरीदारों/अंतिम-उपयोगकर्ताओं) को हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में तत्काल कटौती के जरिये प्रोत्साहन और रियायतें प्रदान की गईं, जिससे इनके व्यापक रूप से अपनाए जाने की प्रक्रिया सुगम हुई।

इस योजना के तहत 16 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद व चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर सब्सिडी दी गई, जिससे 4.29 करोड़ लीटर ईंधन की बचत हुई।

ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति भागीदारों का विविधीकरण

मोदी सरकार की ओर से ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति भागीदारों का विविधीकरण था। पीएम नरेंद्र मोदी ने मल्टी-अलाइनमेंट (बहु-संरेखण) की नीति अपनाई है। इस कूटनीतिक पहल ने भारत के कच्चे तेल की सोर्सिंग के आधार का विस्तार किया है। एक दशक पहले के 27 देशों से बढ़कर आज यह 40 से भी अधिक देशों तक पहुंच गया है।

रूस-यूक्रेन जंग और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव जैसी घटनाओं ने बार-बार यह दिखाया है कि आपूर्ति शृंखलाएं कितनी तेजी से प्रभावित हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, जरा कल्पना कीजिए कि अगर इथनॉल मिश्रण जैसे घरेलू विकल्पों का विस्तार न हुआ होता।

संबंधित जानकारी (Background):
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश (UP News) का विकिपीडिया पेज देखें।


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