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Meta Description: ED: एनसीएल News: ED: एनसीएल के प्रबंधक ने मांगी दो करोड़ रुपये की रिश्वत, केस खुला तो आवास व बैंक लॉकरों से मिले 72 लाख – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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ED: एनसीएल: मुख्य समाचार और अपडेट
ED: एनसीएल: उत्तरी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (एनसीएल), जयंत परियोजना, सिंगरौली में वरिष्ठ प्रबंधक (सिविल) के पद पर रहते हुए शैलेंद्र पसारी ने 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। सीबीआई ने उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। लंबित बिलों के भुगतान के लिए उन्हें 10 हजार रुपये का भुगतान किया गया। जब यह मामला खुला तो रिश्वत की कमाई भी सामने आ गई। सीबीआई ने शैलेंद्र पसारी के परिसर में रेड की। तलाशी के दौरान, पसारी के आवास, बैंक लॉकरों और कार्यालय से 72,97,200 रुपये की बेहिसाब नकदी बरामद की गई।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने 9 जनवरी 2026 को जबलपुर स्थित विशेष पीएमएलए न्यायालय में शैलेंद्र पसारी के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत अभियोग शिकायत (पीसी) दर्ज कराई है। आरोपी के खिलाफ पूर्व संज्ञान सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया है। ईडी ने जबलपुर स्थित सीबीआई और एसीबी द्वारा दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी। पहली एफआईआर संख्या आरसी 0092018ए0006 दिनांक 8 सितंबर 2018 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(2) पठित 13(1)(ए) के तहत दर्ज की गई थी। इसमें शैलेंद्र पसारी, जो उस समय उत्तरी कोयला क्षेत्र लिमिटेड (एनसीएल), जयंत परियोजना, सिंगरौली में वरिष्ठ प्रबंधक (सिविल) थे, को 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था।22.09.2018 को दूसरी एफआईआर संख्या आरसी 0092018ए0007 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) पठित 13(1)(ख) के तहत अनुपातहीन संपत्ति के लिए दर्ज की गई थी। इसमें सीबीआई ने आरोप लगाया था कि पसारी और उनके परिवार के सदस्यों के पास 01.01.2014 से 08.09.2018 की जांच अवधि के दौरान 1.30 करोड़ रुपये (124.12% अनुपातहीन) की संपत्ति थी। ईडी ने अपराध से प्राप्त आय (पीओसी) 1,30,94,155 रुपये निर्धारित की, जिसमें 200 करोड़ रुपये शामिल हैं। सीबीआई द्वारा जब्त की गई 72,97,200/- रुपये की नकद राशि (कानून प्रवर्तन एजेंसी की हिरासत में) और 57,96,955/- रुपये की संपत्ति, जिसे पीएओ संख्या 03/2025 (बीएचजेडओ) दिनांक 13.03.2025 के तहत अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है।न्याय निर्णायक प्राधिकरण, पीएमएलए, नई दिल्ली ने दिनांक 14.08.2025 के आदेश द्वारा उक्त पीएओ की पुष्टि की थी। ईडी ने सीबीआई द्वारा जब्त की गई नकद राशि के साथ-साथ कुर्क की गई संपत्तियों की जब्ती के लिए प्रार्थना की है। ईडी की जांच में पता चला है कि शैलेंद्र पसारी ने जानबूझकर अपराध से प्राप्त धन को अर्जित किया, अपने पास रखा, छिपाया और उसका इस्तेमाल किया। परिवार के कई बैंक खातों के माध्यम से अवैध नकदी को भेजकर और उसे वित्तीय साधनों और संपत्तियों में परिवर्तित करके उसे बेदाग दिखाया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ पीएमएलए, 2002 की धारा 3 के तहत धन शोधन का अपराध सिद्ध हुआ है, जो धारा 4 के तहत दंडनीय है।
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