Meerut Central Market Case: सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद सेंट्रल मार्केट का क्या होगा? जानें क्या निर्देश

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Meerut Central Market Case: सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद सेंट्रल मार्केट का क्या होगा? जानें क्या निर्देश: ताजा अपडेट

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Meerut: सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए शास्त्री नगर योजना क्षेत्र की 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक यानी इमारत के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह में हुए निर्माण को दो महीने के भीतर तोड़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा, यह मामला केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है। प्रशासन ने समय रहते सही कदम उठाए होते, तो इतनी बड़ी समस्या पैदा नहीं होती।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा, कानून का शासन किसी भी हाल में जनभावनाओं या दबाव के आगे नहीं झुक सकता। पीठ ने इस मामले में छह अप्रैल को सुनवाई करते हुए 859 संपत्तियों में से सेंट्रल मार्केट की 44 आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर पूर्ण रोक लगाने और इन संपत्तियों को सील करने की 9 अप्रैल तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी थी। यूपी आवास विकास परिषद ने 8 अप्रैल से सीलिंग की कार्रवाई शुरू की और बृहस्पतिवार को कोर्ट को बताया कि ये 44 संपत्तियां सील कर दी गई हैं। हालांकि सीलिंग के दौरान अफसरों को कई बार व्यापारियों के कड़े प्रतिरोध का सामना भी करना पड़ा।बृहस्पतिवार को पीठ को बताया गया कि सील की गईं 44 संपत्तियों में छह स्कूल, छह अस्पताल, चार बैंक्वेट हॉल, तीन राष्ट्रीयकृत बैंक और एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) शामिल है। इस पर पीठ ने कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस पारदीवाला ने सवाल उठाया कि इन संस्थानों को अनुमति किसने दी। उन्होंने कहा कि हमारे लिए बच्चों, मरीजों और आम लोगों की जान ज्यादा महत्वपूर्ण है। आप लोगों का व्यवसाय किसी की जिंदगी की कीमत पर नहीं चल सकता। कोर्ट ने साफ कहा, सेटबैक को किसी भी तरह वैध नहीं किया जा सकता। कोई भी व्यक्ति जुर्माना या फीस देकर इस अवैध कब्जे को सही नहीं ठहरा सकता।सुप्रीम कोर्ट ने कहा, नियम सख्ती से लागू किए जाएंगे। अवैध निर्माण हटाने के लिए पहले नोटिस दिया जाएगा। कब्जा करने वालों को 10 से 15 दिन का समय मिलेगा कि वे खुद अवैध हिस्सा हटा लें। अगर वे ऐसा नहीं करते तो प्रशासन खुद ध्वस्तीकरण करेगा। इसका खर्च कब्जा करने वालों से वसूला जाएगा।कोर्ट ने कहा, 44 संपत्तियों के अलावा 815 अन्य अवैध संपत्तियां भी हैं। इन सभी के खिलाफ आगे की कार्रवाई के लिए प्रशासन को विस्तृत योजना बनाने का निर्देश दिया जाता है।अदालत ने परिषद को निर्देश दिया कि वह 44 संपत्तियों की स्थिति पर हलफनामा दाखिल करे। इसमें हर संपत्ति की सील करने से पहले और बाद की तस्वीरें शामिल हों, ताकि साफ हो कि कार्रवाई सही तरीके से की गई है।स्कूल व बैंक जैसे संस्थानों ने पीठ से रियायत देने का अनुरोध किया। इस पर कोर्ट ने कहा कि उसे बच्चों सहित अन्य लोगों की जान की चिंता है। हालांकि कोर्ट ने स्कूल में रखी चीजों को लेकर प्रबंधन को अधिकारियों के समक्ष आवेदन करने को कहा है। वहीं, आईडीबीआई बैंक ने करीब 300 लॉकर होने का मुद्दा उठाया। उसे भी अथॉरिटी से संपर्क करने के लिए कहा गया है।प्रशासन की लापरवाही के कारण ही अवैध निर्माण इतने बड़े स्तर पर बढ़े हैं। अब इसे रोकने के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है। अगली सुनवाई जुलाई में होगी। अगली तारीख पर कोर्ट कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा करेगा। – सुप्रीम कोर्टसेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों को सील किए जाने और सुप्रीम कोर्ट की ओर से 859 संपत्तियों पर अवैध निर्माण गिराए जाने के आदेश का ठीकरा व्यापारिक संगठनों ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों पर फोड़ा है।व्यापारियों का आरोप है कि अधिकारियों ने शीर्ष कोर्ट को गुमराह किया है। कार्रवाई के खिलाफ मेरठ संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों के संयुक्त आह्वान पर बृहस्पतिवार को मेरठ बंद रहा। सभी बाजारों के व्यापारी संगठनों ने बंद को पूर्ण समर्थन देते हुए दुकानें बंद रखीं। चाय-पान की छोटी दुकानें खुलीं, तो उन्हें भी बंद करा दिया गया।आबू लेन पर कुछ कंपनियों के शोरूम सुबह खोले गए, जिन्हें संयुक्त व्यापार संघ ने बंद करा दिया। सभी पेट्रोल पंप, दूध की डेयरी, हलवाई की दुकान, मेडिकल स्टोर और चिकित्सकों के क्लिनिक भी बंद रखे गए। मेरठ बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने न्यायालय में काम नहीं किया। संयुक्त व्यापार संघ के पदाधिकारी पूरे शहर में भ्रमण करते दिखाई दिए।

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