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Meta Description: Namo News: Namo Bharat: पश्चिम में नमो भारत तो पूरब में राजभर का शक्ति प्रदर्शन, भाजपा ने 2027 चुनाव का बिगुल फूंका! – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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Namo: मुख्य समाचार और अपडेट
Namo: यूपी में सत्तारूढ़ एनडीए की सरकार ने रविवार को अपने चुनावी मुहिम की शुरुआत कर दी। पश्चिम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो की शुरुआत कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश को साधने का काम किया तो इसी दिन पूर्वांचल में ओपी राजभर और अनिल राजभर ने बड़ी रैलियां कर ब्राह्मणों, ठाकुरों सहित सभी वर्गों को साधने का काम किया। प्रदेश की इन दोनों महत्त्वपूर्ण घटनाओं को यूपी के 2027 के विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में अपने चुनावी मुहिम की शुरुआत मेरठ से ही किया था। इसी तरह 2017 और 2019 के यूपी विधानसभा चुनावों में भी भाजपा की चुनावी रैलियों की शुरुआत मेरठ की धरती से ही हुई थी। यही कारण है कि आज पीएम नरेंद्र मोदी के द्वारा मेरठ को नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो की सौगात देने को अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी माना जा रहा है।पीएम मोदी ने नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो को हरी झंडी दिखाकर इन दोनों महत्त्वपूर्ण सेवाओं की शुरुआत कर दी। 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाले इस 82 किलोमीटर लंबे रूट पर हर दिन मेरठ-दिल्ली के बीच आने-जाने वाले लाखों यात्रियों को लाभ होगा। इसके एक दिन पहले ही पश्चिमी यूपी में सेमीकंडक्टर बनाने के एक प्लांट की शुरुआत हुई है। जेवर एयरपोर्ट भी अपने अंतिम चरण में है। भाजपा का मानना है कि पश्चिमी यूपी में विकास के ये कार्य उसे आगामी चुनावों में बढ़त दिलाने का काम करेंगे।पिछले लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में झटका खा चुकी भाजपा इस बार कोई गलती नहीं करना चाहती। यूजीसी पर अगड़ी जातियों की नाराजगी के बीच प्रदेश सरकार में सहयोगी सुभासपा नेता ओपी राजभर ने रविवार को आजमगढ़ में एक बड़ी रैली की। इस रैली में हजारों लोगों के आने का दावा किया गया है। ओपी राजभर ने स्वयं दावा किया है कि उनकी रैली में बड़ी संख्या में ब्राह्मण, ठाकुर और बनिया-लाला सहित पिछड़ी-दलित जातियों के राजभर, कुर्मी, यादव और अन्य समाज के लोग शामिल हुए।ओपी राजभर की इस रैली में योगी आदित्यनाथ के खास सहयोगी समझे जाने वाले ठाकुर समुदाय के नेता दयाशंकर सिंह भी शामिल हुए। राजभर की रैली में उनकी पार्टी सुभासपा के झंडों से ज्यादा भाजपा के झंडे लगे थे। इस स्थिति को देखकर माना जा रहा है कि यह सुभासपा की बजाय एनडीए गठबंधन की रैली अधिक थी जिसका उद्देश्य यूजीसी पर भाजपा से नाराज चल रहे अगड़े समाज को साधने का था। साथ ही भाजपा पूर्वांचल के राजभर, पासी, बिंद और कुर्मी समुदाय पर भी अपनी पकड़ बरकरार रखना चाहती है।
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