News Updates: बंगाल पहुंचे सीईसी ज्ञानेश कुमार; सहपाठियों पर छात्र के हमले में एक की मौत, सात घायल

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News Updates: बंगाल पहुंचे सीईसी ज्ञानेश कुमार; सहपाठियों पर छात्र के हमले में एक की मौत, सात घायल: ताजा अपडेट

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News: मुख्य समाचार और अपडेट

News: और पढ़ें Trending Videos यह वीडियो/विज्ञापन हटाएं मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारी 9 और 10 मार्च को पश्चिम बंगाल में चुनाव की तैयारियों का जायजा लेंगे। अगले दो दिन तक राजनीतिक दलों, नागरिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक के लिए सीईसी रविवार शाम कोलकाता पहुंच गए। सीईसी ज्ञानेश कुमार जब कोलकाता हवाईअड्डे से अपने होटल जा रहे थे, तब रास्ते में कुछ लोगों ने काले झंडे लहराए और नारे लगाए। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के विधायक तापस चटर्जी ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में सभी वर्गों के लोग शामिल रहे। चटर्जी ने बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के खिलाफ न्यू टाउन में एक प्रदर्शन का नेतृत्व किया।

ममता राज में राष्ट्रपति का विरोध व घुसपैठियों का स्वागत: अनुराग ठाकुर भाजपा की परिवर्तन यात्रा के दौरान उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी में आयोजित जनसभा में अनुराग ठाकुर ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बंगाल में एक तरफ राष्ट्रपति और राज्यपाल का विरोध किया जाता है, जबकि दूसरी तरफ घुसपैठियों और माफियाओं को संरक्षण दिया जाता है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि लंबे समय से राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठ जारी है और कांग्रेस, वाम दलों तथा तृणमूल कांग्रेस ने इसे वोट बैंक की राजनीति के लिए बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव राज्य की अस्मिता, संस्कृति और भविष्य से जुड़ा चुनाव होगा।

News: घटना का पूरा विवरण

1,000 महिला पायलटों वाली देश की पहली एयरलाइन बनी इंडिगो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर घरेलू एयरलाइन इंडिगो ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इंडिगो अब भारत की पहली और एकमात्र ऐसी एयरलाइन बन गई है, जिसके पास 1,000 से अधिक महिला पायलट हैं। एयरलाइन के कुल पायलट कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 17.5 फीसदी है, जो वैश्विक औसत से तीन गुना अधिक है। इंडिगो के अनुसार, उसके कुल कार्यबल में 45 फीसदी से अधिक महिलाएं हैं। इनमें से 30 फीसदी एयरपोर्ट ऑपरेशंस, 25 फीसदी ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर और 23 फीसदी नेतृत्व पदों पर कार्यरत हैं। ग्रुप चीफ एचआर ऑफिसर सुखजीत सिंह पसरिचा ने इसे गर्ल पावर की जीत बताते हुए भविष्य में और अधिक अवसर देने की प्रतिबद्धता जताई। इस मौके पर कंपनी ने इक्विटी, मल्टीकल्चरलिज्म, बिलॉन्गिंग, रिस्पेक्ट, एक्सेसिबिलिटी, कम्युनिटी, एम्पावरमेंट (ईएमबीआरएसीई) पहल के तहत एक विशेष फिल्म भी जारी की। यह मील का पत्थर विमानन क्षेत्र में लैंगिक समानता और समावेशी कार्य वातावरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

एक देश, एक नेता-एक पार्टी की होड़ में भाजपा: ममता बनर्जी प.बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ धरना रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा एक राष्ट्र, एक नेता, एक पार्टी के उन्माद में लोकतांत्रिक संस्थाओं और सांविधानिक पदों का राजनीतिकरण कर रही है। सीएम ममता ने तंज कसते हुए चुनाव आयोग को वैनिश कमीशन कहा। उन्होंने भाजपा पर चुनाव आयोग का दुरुपयोग कर वैध मतदाताओं के नाम हटाने का गंभीर आरोप लगाया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद से करीब 63.66 लाख नाम हटा दिए गए हैं। इसके अलावा 60.06 लाख मतदाताओं को विचाराधीन श्रेणी में रखा है। मुख्यमंत्री ने भाजपा नेतृत्व को दिल्ली के जमींदार बताते हुए कहा कि वे बंगाल को अपमानित करने और डराने की कोशिश कर रहे हैं।

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सीएम ममता ने आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटाए जा रहे हैं। अगर यही मतदाता सूची 2024 में थी, जिसके आधार पर मोदी प्रधानमंत्री बने, तो फिर अब उसी सूची से लोगों को वोट देने से क्यों रोका जा रहा है। ममता ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पीएम से इस्तीफा मांगना चाहिए।

महिला वकीलों को जज बनाने पर विचार करें हाईकोर्ट कॉलेजियम : सीजेआई सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को न्यायपालिका में अधिक संस्थागत सुधारों की वकालत करते हुए कहा कि हाईकोर्टों के कॉलेजियम को न्यायाधीश पद के लिए बार की मेधावी महिला सदस्यों पर एक नियम के तौर पर विचार करना चाहिए, न कि अपवाद रूप में। सीजेआई ने इंडियन वीमन इन लॉ के सम्मेलन में हाफ द नेशन-हाफ द बेंच, ब्रिज द गैप-बैलेंस द बेंच विषय पर एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बार सदस्यों को एक वास्तविकता स्वीकार करनी चाहिए कि महिला सदस्य रियायतें नहीं मांग रही हैं। वे निष्पक्ष और उचित प्रतिनिधित्व की मांग कर रही हैं, जो लंबे समय से लंबित है। जब स्वयं यह पेशा इस सत्य को आत्मसात कर लेगा, तभी न्यायपालिका तक पहुंचने का मार्ग स्पष्ट होगा।

जस्टिस सूर्यकांत ने उच्च न्यायालयों के कॉलेजियम से अनुरोध किया कि वे अपने विचार क्षेत्र का विस्तार करें और सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रही अपने-अपने राज्यों की महिला अधिवक्ताओं को पदोन्नति के लिए शामिल करें। यदि प्रगति को सार्थक बनाना है, तो उसे संस्थागत रूप देना होगा। उन्होंने कहा कि कहानी यह नहीं होनी चाहिए कि किसी एक व्यक्ति को अधिक प्रतिनिधित्व मिला, बल्कि यह होनी चाहिए कि उच्चतम न्यायालय और देश भर के उच्च न्यायालयों ने समझ-बूझकर निष्पक्षता को अपनी प्रक्रियाओं में समाहित किया।

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