SBI बैंक फ्रॉड लखनऊ : दो पूर्व एसबीआई अधिकारियों को 3-3 साल की सजा, ₹5.70 करोड़ के घोटाले में दोषी करार

Deepak Pandit
SBI बैंक फ्रॉड फैसला में दो पूर्व एसबीआई अधिकारियों को सजा सुनाते हुए अदालत की तस्वीर

लखनऊ, 5 नवंबर 2025 (Up Khabar Hindi):देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से जुड़े एक पुराने वित्तीय घोटाले में आखिरकार अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। लखनऊ की सीबीआई विशेष अदालत ने मंगलवार को 2010 में दर्ज हुए ₹5.70 करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में दो पूर्व बैंक अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की सजा और ₹30,000 का जुर्माना लगाया है।यह SBI बैंक फ्रॉड फैसला (SBI bank fraud verdict) न केवल बैंकिंग जगत बल्कि सरकारी संस्थानों में जवाबदेही और ईमानदारी को लेकर एक अहम उदाहरण बन गया है।


🔸 क्या था पूरा मामला?

मार्च 2010 में लखनऊ के मुख्य शाखा कार्यालय से यह मामला शुरू हुआ था। SBI के तत्कालीन डिप्टी मैनेजर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि Addyapolo Projects Pvt. Ltd. नाम की कंपनी ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टर्म लोन हासिल किया।जांच में पाया गया कि लगभग ₹5.70 करोड़ का यह लोन तीन अस्तित्वहीन फर्मों — Zassoda Global Marketing, R.K. Traders और Sambhav Enterprises — के नाम से स्वीकृत किया गया था। ये सभी कंपनियां केवल कागज़ों पर मौजूद थीं, जबकि उनका कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था।CBI जांच में यह सामने आया कि SBI के दो अधिकारी, सुभाष चंद्र अग्रवाल (पूर्व डिप्टी मैनेजर, मुख्य शाखा लखनऊ) और जॉय चक्रवर्ती (पूर्व CPC डेस्क अधिकारी) ने इस फर्जीवाड़े में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने बिना उचित सत्यापन के लोन स्वीकृति दी और बैंक की आंतरिक नीतियों का उल्लंघन किया।


🔸 CBI कोर्ट का फैसला

लखनऊ CBI कोर्ट के विशेष जज ने दोनों पूर्व अधिकारियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, दोनों पर ₹30,000-₹30,000 का जुर्माना भी लगाया गया। वहीं, फर्जीवाड़े में शामिल Addyapolo Projects Pvt. Ltd. कंपनी पर ₹10 लाख का आर्थिक दंड लगाया गया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि,> “सरकारी बैंकों में जनता का पैसा होता है। ऐसे मामलों में किसी भी अधिकारी द्वारा लापरवाही या जानबूझकर की गई अनियमितता को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।”

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🔸 जांच एजेंसियों की भूमिका

CBI ने इस मामले की जांच लगभग तीन वर्षों तक की। इस दौरान कई बैंक अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए गए। जांच में बैंक की आंतरिक ऑडिट टीम की रिपोर्ट, ईमेल रिकॉर्ड्स, फंड-ट्रांसफर ट्रेल और अकाउंट बुक्स की भी गहन पड़ताल की गई।CBI ने कोर्ट में यह प्रमाणित किया कि आरोपियों ने जानबूझकर दस्तावेज़ों को अनदेखा किया और अपनी पद की शक्ति का दुरुपयोग किया।


🔸 बैंकिंग जगत में संदेश

यह SBI बैंक फ्रॉड फैसला बैंकिंग जगत के लिए एक बड़ा संदेश है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या फर्जीवाड़े को बख्शा नहीं जाएगा।बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निर्णय न केवल भविष्य में होने वाले घोटालों पर अंकुश लगाएंगे बल्कि बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई परिभाषा तय करेंगे।SBI के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि,> “यह फैसला सभी बैंकों को अपने आंतरिक ऑडिट और कंप्लायंस सिस्टम को और सशक्त बनाने की दिशा में प्रेरित करेगा।”


🔸 ग्राहकों और बैंक कर्मचारियों के लिए सबक

इस केस ने यह भी साबित किया कि वित्तीय संस्थानों में छोटी-सी चूक या मिलीभगत से करोड़ों रुपए का नुकसान हो सकता है। इसलिए अब बैंकों ने loan approval process को और सख्त करने का निर्णय लिया है।ग्राहकों को भी अब सतर्क रहना चाहिए कि वे किसी भी फर्जी कंपनी या गलत सलाह पर लोन न लें। वहीं, बैंक अधिकारियों के लिए यह एक चेतावनी है कि यदि वे अपनी पद की शक्ति का दुरुपयोग करते हैं, तो न्याय व्यवस्था उन्हें बख्शेगी नहीं।


🔸 आगे की कानूनी प्रक्रिया

दोनों दोषियों को सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील का अधिकार है। हालांकि फिलहाल उन्हें हिरासत में ले लिया गया है और आगे की प्रक्रिया शुरू हो गई है। CBI ने कहा है कि वह इस निर्णय को landmark judgment के रूप में देख रही है क्योंकि यह केस पिछले एक दशक से लंबित था।


🔸 समाज में असर और निष्कर्ष

लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश के बैंकिंग सर्कल में यह खबर तेजी से चर्चा में है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सरकारी और निजी दोनों बैंकों में पारदर्शिता को और मजबूती देगा।इस SBI bank fraud verdict ने साफ कर दिया है कि अब बैंकिंग सेक्टर में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।


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