Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के लिए सज रहे शिवालय, जानिए बरेली के नाथ मंदिरों का पौराणिक महत्व

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Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के लिए सज रहे शिवालय, जानिए बरेली के नाथ मंदिरों का पौराणिक महत्व: ताजा अपडेट

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Mahashivratri: मुख्य समाचार और अपडेट

Mahashivratri: 1 of 8 बरेली के नाथ मंदिर – फोटो : अमर उजाला

डमरू की गूंज और हर-हर महादेव का उद्घोष सुनाई देने लगे, तो समझ लीजिए कि नाथ नगरी अपने आराध्य के सबसे बड़े पर्व के स्वागत के लिए तैयार है। महाशिवरात्रि के लिए इस बार भी शिव मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है। प्रशासन और मंदिर समितियों ने सुरक्षा व सुगमता के विशेष इंतजाम किए हैं। कहीं, मंदिरों को भव्य डिजिटल लाइटों से सजाया जा रहा है, तो कहीं जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों को व्यवस्थित करने के लिए बैरिकेडिंग का काम पूरा हो चुका है। सात नाथ मंदिरों की मान्यता व महाशिवरात्रि पर चल रहीं तैयारियों को बताती रिपोर्ट….

Mahashivratri: घटना का पूरा विवरण

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2 of 8 बाबा अलखनाथ मंदिर – फोटो : अमर उजाला

करीब 1000 वर्ष पुराना बाबा अलखनाथ मंदिर शहर के प्राचीन मंदिरों में शामिल है। बताया जाता है कि यहां पर पहले घना वन हुआ करता था। यहीं पर संत अलखिया तपस्या कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें पेड़ के नीचे शिवलिंग का पता चला। खोदाई करने पर वहां स्वयंभू शिवलिंग निकला, जिसे वहां स्थापित किया गया। मंदिर के महंत कालू गिरि महाराज ने बताया कि मंदिर में साफ-सफाई से लेकर सजावट की तैयारियां चल रही हैं। महाशिवरात्रि पर रात 12 बजे से ही जलाभिषेक शुरू हो जाएगा।

Mahashivratri: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

3 of 8 बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर – फोटो : अमर उजाला

प्रेमनगर स्थित त्रिवटीनाथ मंदिर का इतिहास 550 वर्ष पुराना है। यहां स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। मान्यता है कि एक चरवाहा तीन वट वृक्षों के नीचे आराम कर रहा था। तब सपने में उसे शिवलिंग की जानकारी हुई। फिर यहां छोटे से मंदिर की स्थापना हुई और भक्तों की मनोकामना पूरी होने लगी। मंदिर के मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने बताया कि महाशिवरात्रि पर तड़के आरती के बाद जलाभिषेक शुरू हो जाएगा। भक्तों के लिए एक ओर से प्रवेश और दूसरी ओर से निकास की व्यवस्था रहेगी।

4 of 8 धोपेश्वरनाथ मंदिर – फोटो : अमर उजाला

कैंट स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर महाभारत कालीन है। मान्यता है कि अत्रि ऋषि के शिष्य धूम्र की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और ऋषि की इच्छा अनुसार यहां पर शिवलिंग के रूप में प्रतिष्ठित हो गए। मान्यता है कि मंदिर में बने कुंड में स्नान करने से सभी प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते है। पुजारी धनश्याम दास ने बताया कि मंदिर को सजाया जा रहा है। एक दो दिन में तैयारी पूरी हो जाएगाी। महाशिवरात्रि पर सुबह आरती के बाद मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे।

5 of 8 बाबा तपेश्वरनाथ मंदिर – फोटो : अमर उजाला

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