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Meta Description: Lakhimpur News: Lakhimpur Kheri News: कच्चा व सड़ा मांस खाकर लावारिस कुत्ते हो रहे हिंसक – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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Lakhimpur: मुख्य समाचार और अपडेट
Lakhimpur: स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में हर माह 2000 लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा रहे हैं। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नगर पालिका शहर में शेल्टर होम के लिए जगह तक नहीं तलाश पाई है।पशु चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश मांस-मछलियों की दुकानों के पास कुत्तों का जमावड़ा रहता है, क्याेंकि यहां पर कुत्तों को आसानी से कच्चा मांस मिल जाता है। इसे खाकर कुत्तों में शिकार की प्रवृत्ति अधिक सक्रिय हो जाती है। कच्चे मांस और मछली में मौजूद बैक्टीरिया व परजीवी कुत्तों को बीमार भी कर सकती है। कुत्तों में चिड़चिड़ापन और व्यवहार में बदलाव देखने को मिल रहा है।पशु चिकित्सक डॉ. विवेक ने बताया कि कुत्तों को कच्चा मांस नहीं मिलना चाहिए। इससे वे भेड़िया प्रवृति के होते हैं। कच्चा मांस शिकार प्रवृत्ति को अधिक सक्रिय कर देता है। इससे कुत्ते जल्दी उत्तेजित होकर हिंसक हो जाते है।जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. संतोष मिश्रा ने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद रैबीज होता है तो मरीज में बुखार, सिर दर्द, पारी से डर (हाईड्रोफोबिया), तेज हवा से डर (एरोफोबिया), भ्रम, बेचैनी, गले की मांसपेशियों में एठन, लकवा आदि की शिकायतें होती हैं। ऐसे में अंततः मरीज की 8 से 10 दिन में रोगी की मौत हो जाती है। इसलिए कुत्ते के काटने के 24 घंटे के अंदर वैक्सीन अवश्य लगवाएं।जिले में इतने लोगों को लगी वैक्सीन की डोजवर्ष 2023 – 69881वर्ष 2024 – 79033वर्ष 2025 – 60502 (दिसंबर तक)बचाव एवं रोकथाम-कुत्ते के काटते ही घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से 15-20 मिनट तक अच्छे से धोएं।-नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाएं।-यदि जरूरत हो तो रैबीज इम्यूनोग्लोब्यूलिन भी लगवाएं।-पालतू कुत्तों का नियमित टीकाकरण कराएं।-बच्चों को बेसहारा कुत्तों से दूर रखें।-कुत्तों को कच्चा मांस खाने को न दें।कुत्ते जन्म से ही मांसाहारी होते हैं। लोग घर में पालकर उन्हें बिस्किट और खाना देते हैं। इससे उनकी प्रवृत्ति बदल जाती है। हालांकि, अगर कच्चा मांस खाने से कुत्तों को स्वाद आ जाता है तो वह आक्रामक और नरभक्षी होकर काटने लगते हैं।-डॉ. अनिरुद्ध सिंह, पशु चिकित्सकशेल्टर होम के लिए जगह बड़खेरवा में जो जगह देखी गई थी, वह फाइनल नहीं हो पा रही है। नई जगह तलाश की जा रही है। फिलहाल, नगर पालिका की तरफ से बेसहारा कुत्तों को पकड़कर रखने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।-संजय कुमार, ईओ, नगर पालिका लखीमपुर
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