Supreme Court Updates: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी- लोगों को अदालत के फैसलों की आलोचना करने का पूरा अधिकार

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Supreme Court Updates: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी- लोगों को अदालत के फैसलों की आलोचना करने का पूरा अधिकार: ताजा अपडेट

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Meta Description: Supreme News: Supreme Court Updates: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी- लोगों को अदालत के फैसलों की आलोचना करने का पूरा अधिकार – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।

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Supreme: मुख्य समाचार और अपडेट

Supreme: सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने माना कि इस प्रोजेक्ट का ‘महत्वपूर्ण और सकारात्मक असर’ पड़ेगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि बीएमसी (मुंबई नगर निगम) हर साल हाई कोर्ट को रिपोर्ट देगी, जिसमें बताया जाएगा कि जितने मैंग्रोव हटाए गए हैं, उनकी भरपाई (नए पेड़ लगाकर) कैसे की जा रही है।इस मामले में एनजीओ ‘वनशक्ति’ ने याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि बीएमसी ने पहले से किए गए पौधारोपण को दिखाकर कोर्ट से अनुमति ली। उन्होंने यह भी कहा कि सैटेलाइट तस्वीरों से साबित होता है कि कुछ बातें सही तरीके से नहीं बताई गईं। वहीं, बीएमसी की तरफ से सरकार के वकील ने कहा कि इस सड़क के बनने से ट्रैफिक कम होगा और लोगों का समय बचेगा, इसलिए यह प्रोजेक्ट जरूरी है। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 45,000 मैंग्रोव प्रभावित होंगे, जिनमें से लगभग 9,000 पेड़ हमेशा के लिए काटे जाएंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 20,000 करोड़ रुपये का है और 103 हेक्टेयर इलाके में फैला हुआ है।

लोगों को अदालत के फैसले की आलोचना करने का अधिकार- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों को अदालत के फैसलों की आलोचना करने का पूरा अधिकार है। अदालत ने यह भी साफ किया कि न्यायपालिका को ऐसी आलोचनाओं को लेकर जरूरत से ज्यादा संवेदनशील नहीं होना चाहिए। दरअसल, कोर्ट के सामने एक याचिका आई थी जिसमें एनसीईआरटी की कक्षा 8 की पुरानी सामाजिक विज्ञान की किताब से एक टिप्पणी हटाने की मांग की गई थी। इस टिप्पणी में कहा गया था कि हाल के कुछ फैसलों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को अतिक्रमणकारी के रूप में देखा जाता है। याचिकाकर्ता, जो एनसीईआरटी के पूर्व सदस्य हैं, ने इस पर आपत्ति जताई थी।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने इस याचिका को सुनने से ही इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह सिर्फ एक दृष्टिकोण है और स्वस्थ आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि किताब में न्यायपालिका के अच्छे कामों का भी जिक्र है, इसलिए सिर्फ एक आलोचनात्मक टिप्पणी को हटाने की जरूरत नहीं है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस मामले की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। इस समिति में देश के बड़े कानूनी विशेषज्ञ शामिल हैं, जो किताब के उस अध्याय को दोबारा तैयार करेंगे जिसमें न्यायपालिका और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों की चर्चा है।

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