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Meta Description: UP: पिता News: UP: पिता की मौत के बाद बिखरा अंशिका का कुनबा… गलत आचरण के चलते सबने नाता तोड़ा; भाई भी हुआ अलग – जानिए क्या है पूरा मामला और ताजा अपडेट्स।
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गलत आचरण के चलते गांव वालों ने उनसे दूरियां बना ली थीं। भाई ने भी रिश्ता तोड़ लिया। ग्रामीणों ने बताया कि सिंघड़िया फायरिंग कांड की खबर गांव में मिली तो किसी को खास आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि सबको अंशिका और उसके परिवार के गलत आचरण के बारे में पहले से पता था। विज्ञापन विज्ञापन
UP: पिता: घटना का पूरा विवरण
गांव के बुजुर्गों, पड़ोसियों और युवाओं से बातचीत में एक जैसी बात सामने आई। अंशिका का परिवार कई वर्षों से गांव के सामाजिक ताने-बाने से लगभग कट चुका था और उनकी संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पहले से ही लोगों की राय सही नहीं थी।
ग्रामीणों ने नाम न छापने के गुजारिश के साथ बताया कि अंशिका के पिता किसान थे। कोरोना काल में उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिवार बेलगाम हो गया। घर में मां, चार बहनें और एक भाई हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि तीसरी की शादी नौ फरवरी को तय है। गलत आचरण के चलते गांव वालों ने उनसे दूरियां बना ली थीं। भाई ने भी रिश्ता तोड़ लिया। ग्रामीणों ने बताया कि सिंघड़िया फायरिंग कांड की खबर गांव में मिली तो किसी को खास आश्चर्य नहीं हुआ, क्योंकि सबको अंशिका और उसके परिवार के गलत आचरण के बारे में पहले से पता था।गांव के बुजुर्गों, पड़ोसियों और युवाओं से बातचीत में एक जैसी बात सामने आई। अंशिका का परिवार कई वर्षों से गांव के सामाजिक ताने-बाने से लगभग कट चुका था और उनकी संदिग्ध गतिविधियों को लेकर पहले से ही लोगों की राय सही नहीं थी।ग्रामीणों ने नाम न छापने के गुजारिश के साथ बताया कि अंशिका के पिता किसान थे। कोरोना काल में उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिवार बेलगाम हो गया। घर में मां, चार बहनें और एक भाई हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है, जबकि तीसरी की शादी नौ फरवरी को तय है। गोरखपुर के कैंट थाना क्षेत्र के सिंघड़िया चौराहे पर अस्पताल मैनेजर पर गोली चलाने की आरोपी अंशिका सिंह का मामला बिखरते पारिवारिक मूल्यों के बिखरने की दास्तां है। ग्रामीणों के मुताबिक, कोरोना काल में पिता की मौत के बाद पूरा कुनबा ही बिखर गया।
अंशिका परिवार की सबसे छोटी बेटी है। इकलौता भाई परेशान होकर करीब तीन साल पहले शादी के बाद पत्नी के साथ पुणे चला गया और तभी से गांव से उसका रिश्ता लगभग समाप्त हो गया। इसके बाद से वह नहीं लौटा।
UP: पिता: निष्कर्ष और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
ग्रामीणों के अनुसार, अंशिका, उसकी मां और मंझली बहन के आचरण को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रुपये लेने के बाद किसी पर भी आरोप लगा देना उनकी आदत में शुमार था। इसी कारण गांव के लोग उनसे दूरी बनाकर रखने लगे थे। कुछ ग्रामीणों का तो यहां तक कहना है कि डर के कारण कोई उनके दरवाजे तक जाने से कतराता था।
मां और बेटियां अक्सर जाती थीं गांव से बाहर
गांव की महिलाओं का दावा है कि मां और दोनों बेटियां अक्सर घर से बाहर रहती थीं और दो-चार दिन बाद आती थीं। ग्रामीणों के अनुसार, इन्हीं परिस्थितियों के चलते परिवार के इकलौते बेटे ने भी रिश्ते तोड़ लिया और पुणे में बस गया। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जब अपने ही घर का बेटा भरोसा नहीं कर पाया, तो गांव के लोग क्या भरोसा करते।
आठवीं पास है अंशिका, मंझली बहन ने की है 10वीं तक पढ़ाई
ग्रामीणों के मुताबिक, मंझली बहन किसी तरह कक्षा 10 तक पढ़ सकी, जबकि अंशिका आठवीं तक की पढ़ाई भी मुश्किल से पूरी कर पाई। शुरू से ही उसकी संगत को लेकर गांव में चर्चा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि उसे कई बार संदिग्ध लोगों के साथ देखा गया, जिससे गांव में पहले से ही अविश्वास का माहौल बन चुका था। मां व दोनों बेटियां अक्सर विवादों में रहती थीं।
अंशिका और उसके गिरोह पर गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की तैयारी
गोरखपुर की खोराबार पुलिस ने अंशिका और उसके गिरोह के छह साथियों के खिलाफ थार चोरी और फर्जी नंबर प्लेट लगाने के मामले में गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की तैयारी में है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में गाजीपुर के नोनहरा निवासी चंदन नारायण ने 12 अक्तूबर 2025 को खोराबार थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने आरोप लगाया था कि आरोपी दिल्ली से चोरी हुई थार गाड़ी पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर घूमते थे।
पुलिस ने 13 अक्तूबर को बड़हलगंज के दोरम्हा निवासी प्रिय प्रवास दुबे उर्फ विक्की और देवरिया के बरहज बाजार निवासी आकाश वर्मा उर्फ बंटी को वनसप्ती तिराहे के पास गिरफ्तार कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया। वहीं, अंशिका ने मामले में अग्रिम जमानत ले ली थी, जबकि तीन अन्य आरोपियों की अब भी तलाश जारी है।
पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि गाड़ी में चार फर्जी नंबर प्लेट लगीं थीं। इसमें दो हरियाणा, एक बिहार और एक गोरखपुर की थीं। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने सितंबर माह में दिल्ली से थार किराए पर ली थी और बाद में उसे लेकर भाग गए थे।
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